हिमाचल में अफसरों की फौज घटेगी, IAS-IPS के पदों पर चलेगी कैंची; प्रशासनिक खर्च में कटौती की तैयारी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को प्रशासन, परिवहन और कर्मचारियों से जुड़े कई बड़े फैसलों का ऐलान किया। मंडी में 25 नई इलेक्ट्रिक बसों को वर्चुअल हरी झंडी दिखाने के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अफसरों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को मजबूत कर योजनाओं को जमीन पर उतारना है। इसी दिशा में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में कटौती के साथ एचआरटीसी के बेड़े में 1000 नई बसें शामिल करने की तैयारी की जा रही है।
IAS के 153 पद घटकर 130 होंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में आईएएस के 153 स्वीकृत पदों को घटाकर 130 किया जा रहा है। आगे इसे 100 से 110 पदों के बीच लाने की योजना है। वहीं आईएफएस के 118 पद घटाकर 83 और आईपीएस के 96 पदों में भी कटौती की जा रही है। दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलों को जल्द मंजूरी देने की बात भी कही गई है।
सरकार का दावा है कि प्रशासनिक पदों और अनावश्यक खर्चों में कटौती से हर साल करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी, जिसे विकास और जनसेवा के कार्यों में लगाया जाएगा।
‘अफसरों की फौज नहीं, धरातल पर काम चाहिए’
सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश को बड़ी संख्या में केवल कागजी अफसरों की जरूरत नहीं है। सरकार ऐसे प्रशासन पर जोर दे रही है जो योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारे और जनता को उनका सीधा लाभ मिले। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्च कम करने के साथ व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाना है।
युवाओं को ई-बस खरीद पर 50% सब्सिडी
परिवहन क्षेत्र में युवाओं को जोड़ने के लिए भी सरकार ने राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ई-बस खरीदने वाले युवाओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ पांच साल तक 80 हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। वहीं डीजल बस खरीदने पर 30 प्रतिशत सब्सिडी और पांच साल तक 50 हजार रुपये प्रतिमाह देने की योजना है।
इसके अलावा छात्रों के लिए पांच रुपये प्रतिदिन में कॉलेज बस पास और महिलाओं को बस किराये में 50 प्रतिशत छूट जारी रखने की बात भी मुख्यमंत्री ने दोहराई।
कर्मचारियों के एरियर पर भी सरकार का फैसला
कर्मचारियों के लंबित एरियर को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पे-एरियर पहले ही जारी किया जा चुका है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को 35 प्रतिशत, जबकि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को 15 प्रतिशत एरियर देने का फैसला लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारी छोड़ने और रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद सरकार ने कर्मचारियों का वेतन और पेंशन नहीं रोकी है।
प्रियंका गांधी के मंडी दौरे पर भी स्थिति साफ
प्रियंका गांधी के प्रस्तावित मंडी दौरे को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई राजनीतिक रैली या जनसभा नहीं होगी। उनके मुताबिक प्रियंका गांधी आपदा के दौरान किए गए वादे के तहत निर्मित स्कूल का उद्घाटन करेंगी और विद्यार्थियों से संवाद करेंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी राजनीतिक जनसभाएं सितंबर में सोलन से प्रस्तावित हैं।
कुल मिलाकर सरकार के इन फैसलों में प्रशासनिक खर्च कम करने, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने और कर्मचारियों के लंबित वित्तीय मामलों को आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दे रहा है।






