CM सुक्खू की भरे मंच से चेतावनी: 'अटैची लेकर बिके नेताओं का अब आएगा नंबर'
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव को करीब एक साल का समय बाकी है, लेकिन चुनावी माहौल अभी से गरमाता नजर आ रहा है। बिलासपुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले नेताओं पर भरे मंच से तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने मंच से कहा कि “जो अटैची लेकर बिके हैं, अब उनका भी नंबर आने वाला है।”
सीएम सुक्खू ने कहा कि वह किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं और राजनीतिक लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने भ्रष्टाचार के रास्ते से प्रदेश को नुकसान पहुंचाया है और अब सरकार उनके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई भी लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने जनता से इस लड़ाई में साथ देने की अपील करते हुए दावा किया कि जनता का समर्थन मिला तो 2027 में हिमाचल आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनेगा।
दलबदल करने वाले नेताओं पर निशाना
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा को लेकर विजिलेंस शिकायत और जांच से जुड़ी चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हैं। ऐसे में सुक्खू के मंच से दलबदल करने वाले नेताओं पर सीधे हमले को आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस आने वाले चुनाव में दलबदल के मुद्दे को भाजपा के खिलाफ बड़े राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। वहीं, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
सोशल मीडिया पर भी भाजपा को घेरा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा की सोशल मीडिया रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर माहौल बनाने के लिए करीब 50 लोगों की विशेष टीम लगाई गई है, जो उनके खिलाफ रील और वीडियो तैयार करती है।
सीएम ने संकेत दिया कि अब राजनीतिक मुकाबला केवल चुनावी रैलियों और विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई का अहम मैदान बन चुके हैं।
जंगली मुर्गे के विवाद का भी जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जंगली मुर्गे के विवाद का भी जिक्र किया। यह मुद्दा पहले भी हिमाचल की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच विवाद का कारण बन चुका है। दिसंबर 2024 में जंगली मुर्गे से जुड़ा मामला सोशल मीडिया से लेकर विधानसभा तक पहुंचा था और भाजपा ने इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
अब चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि हिमाचल की आगामी सियासत में ‘रील बनाम रियल’ और दलबदल का मुद्दा दोनों ही बड़े राजनीतिक हथियार बन सकते हैं।






