लाहौल स्पीति: ग्रामीणों की मेहनत से फिर बहाल हुई सिंचाई कुहल, ग्लेशियर काट खेतों तक पहुंचाया पानी
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति की जोबरंग पंचायत के राशेल गांव में ग्रामीणों ने एक बार फिर सामूहिक एकजुटता और मेहनत की मिसाल पेश की है। यहां ग्रामीणों ने खेतों तक पानी पहुंचाने वाली पुरानी सिंचाई कुहल को फिर से बहाल कर दिया है, जो भारी ग्लेशियर के मलबे से पूरी तरह अवरुद्ध हो गई थी।
जानकारी के अनुसार, सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के चलते लगभग 200 मीटर लंबे और 7 से 10 फीट ऊंचे ग्लेशियर का मलबा कुहल के ऊपर आ गिरा था, जिससे खेतों तक पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई थी। ऐसे में रविवार को गांव के लोगों ने मिलकर करीब तीन घंटे तक मेहनत करते हुए ग्लेशियर को काटकर हटाया और कुहल को दोबारा चालू किया।
राशेल गांव निवासी इंद्रजीत भानू ने बताया कि सर्दियों में बर्फबारी के कारण कुहल पूरी तरह बंद हो गई थी, जिससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहा था। लेकिन ग्रामीणों ने मिलकर कठिन परिस्थितियों में भी कुहल को साफ कर पानी को खेतों तक पहुंचाने में सफलता हासिल की।
लाहौल घाटी में कृषि पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है, क्योंकि यहां बारिश बेहद कम होती है। ऐसे में फसल की बुआई और सिंचाई के लिए कुहलें जीवनरेखा की तरह काम करती हैं। इसी वजह से हर साल ग्रामीणों को ग्लेशियर और बर्फ के कारण अवरुद्ध हुई इन नहरों को बहाल करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है।
जोबरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोम देव योकी ने बताया कि सर्दी खत्म होते ही जैसे ही कृषि सीजन शुरू होता है, ग्रामीणों को कुहल की मरम्मत और सफाई में जुटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार बर्फबारी के कारण ग्लेशियर का मलबा कुहलों पर गिर जाता है, जिसे हटाना एक चुनौती बन जाता है, लेकिन ग्रामीण हर साल इस चुनौती का डटकर सामना करते हैं।
14 घरों की छोटी सी आबादी वाले राशेल गांव में ग्रामीणों की यह मेहनत न सिर्फ उनकी आजीविका का आधार है, बल्कि सामूहिक सहयोग और संघर्ष की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश करती है।












