2 रुपये का टिकट... 5 करोड़ तक का इनाम और 27 साल बाद हिमाचल में लॉटरी की वापसी!
राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी विनियमन नियम 2026 को मंजूरी देते हुए इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य सरकार ने लॉटरी टिकट की न्यूनतम कीमत महज 2 रुपये तय की है। वहीं, किसी भी लॉटरी स्कीम में पहला इनाम 10,000 रुपये से कम का नहीं होगा। ट्रेजरी, लेखा और लॉटरी निदेशालय की ओर से तैयार किए गए इन नए नियमों में अब राज्य में लॉटरी का पूरा खेल सरकार की सीधी निगरानी में खेला जाएगा। इसका प्रशासनिक मुख्यालय शिमला में स्थापित होगा।
1 लाख से 5 करोड़ तक होगी इनाम राशि
सरकार ने साप्ताहिक, मासिक और बंपर ड्रॉ का विकल्प रखा है। प्रस्ताव के अनुसार इनाम राशि एक लाख से लेकर 5 करोड़ तक हो सकती है। लॉटरी सिस्टम के लिए कई तरह के नियम भी रखे गए हैं। सरकार का दावा है कि नई लॉटरी व्यवस्था से राजस्व बढ़ेगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी
9 बजे के बाद किसी भी ड्रॉ की अनुमति नहीं
राज्य सरकार के वित्त विभाग के कोष, लेखा और लॉटरी निदेशालय ने इन नियमों को अधिसूचित किया। नए नियमों के अनुसार जनता की जेब और हितों का खास ख्याल रखा गया है। इसके अलावा समय को लेकर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है। रात 9:00 बजे के बाद किसी भी ड्रॉ की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा एक दिन में सभी स्कीमों को मिलाकर अधिकतम 24 ही ड्रॉ हो सकेंगे। सालभर में केवल 6 विशेष बंपर ड्रॉ निकालने की छूट होगी।
राष्ट्रीय त्योहारों और अवकाश के दिन लॉटरी के पहिये पूरी तरह थमे रहेंगे। हर टिकट पर राज्य सरकार का लोगो, निदेशक के डिजिटल हस्ताक्षर, बारकोड, क्यूआर कोड और छपाई का सटीक समय दर्ज होगा। फिजिकल टिकटों पर बड़े अक्षरों में लिखा होगा— फॉर सेल इन हिमाचल प्रदेश ऑनली। वित्त विभाग ने ड्राफ्ट में साप्ताहिक, मासिक और बंपर ड्रा तीनों का विकल्प रखा है। टिकट की कीमत 10 से 500 रुपये तक हो सकती है। इनाम की राशि एक लाख से पांच करोड़ तक रखने का प्रस्ताव है, लेकिन लाटरी का साइज, ड्रा की फ्रीक्वेंसी और टिकट दर पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री लगाएंगे।
बिना क्यूआर कोड के टिकट हुआ, तो डिस्ट्रीब्यूटर नपेगा
फर्जी टिकटों के धंधे को जड़ से उखाड़ने के लिए सरकार ने सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए हैं। ऑनलाइन लॉटरी का मुख्य सेंट्रल कंप्यूटर सर्वर राज्य की सीमा के भीतर ही रहेगा, जबकि इसका मिरर सर्वर सीधे शिमला निदेशालय में लगेगा, जहां से अधिकारी हर पल की लाइव मॉनीटरिंग करेंगे। लॉटरी के टिकट और ऑनलाइन स्टेशनरी केवल सरकारी प्रेस या फिर भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन मुंबई से मान्यता प्राप्त हाई-सिक्योरिटी प्रेस में ही छापे जाएंगे।
रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाया, तो निर्णायक के खिलाफ मुकदमा
लॉटरी का परिणाम निकालने वाले निर्णायकों (प्रथम और द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारियों) की जवाबदेही तय कर दी गई है। अगर किसी निर्णायक या उनके किसी सगे-संबंधी का लॉटरी के किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर, सब-डिस्ट्रीब्यूटर या रिटेलर के साथ व्यावसायिक या वित्तीय कनेक्शन निकलता है, तो वे ड्रॉ की प्रक्रिया से दूर रहेंगे। सभी को ड्यूटी से पहले नो कॉन्फ्लिक्ट का हलफनामा देना होगा। अगर किसी ने यह बात छिपाई, तो उसे तुरंत बर्खास्त कर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उसके खिलाफ सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
लापरवाही पर जब्त होगी जमानत राशि, देना होगा भारी हर्जाना
टेंडर मिलने और एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर पहला ड्रॉ करवाना अनिवार्य होगा। अगर कंपनी ऐसा करने में नाकाम रहती है, तो उसकी पूरी जमानत राशि सरकारी खजाने में जब्त कर ली जाएगी। यही नहीं, अगर डिस्ट्रीब्यूटर बिना किसी ठोस वजह के छपे हुए टिकटों को नहीं उठाता है, तो सरकार उससे नुकसान की पूरी भरपाई बतौर जुर्माना वसूल करेगी।






