वन महोत्सव में मंडी को चिनार की सौगात देने की उठी मांग, केके शर्मा बोले, मंडी की जलवायु चिनार के लिए अनुकूल, शहर की हरियाली और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
वन महोत्सव के अवसर पर मंडी शहर में चिनार के पौधों का रोपण कर इसे हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य की नई पहचान देने की मांग उठी है। भारतीय संस्कृति निधि के सदस्य केके शर्मा ने वन विभाग से इस दिशा में ठोस पहल करने का आग्रह किया है।उन्होंने जारी बयान में कहा कि चिनार अपनी भव्यता, विशाल आकार, घनी छाया और पर्यावरणीय महत्व के कारण विश्वभर में विशेष पहचान रखता है। कश्मीर की पहचान माने जाने वाले इस वृक्ष का मंडी से भी ऐतिहासिक जुड़ाव है। वर्तमान में टारना माता मंदिर परिसर में चिनार का एक पुराना वृक्ष मौजूद है, जो शहर की प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंडी की ठंडी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां चिनार के विकास के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं। शिमला के अनेक क्षेत्रों में भी चिनार के वृक्ष सफलतापूर्वक विकसित हो चुके हैं, जिससे इसकी संभावनाएं और अधिक मजबूत होती हैं। केके शर्मा ने सुझाव दिया कि वन विभाग वन महोत्सव के तहत शहर के पार्कों, शिक्षण संस्थानों, मंदिर परिसरों, सार्वजनिक उद्यानों तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर चिनार के पौधे लगाए। उनका कहना है कि इससे मंडी की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, लोगों को भविष्य में घनी छाया प्राप्त होगी तथा शहर का आकर्षण भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में चिनार के विकसित वृक्ष मंडी की नई पहचान बन सकते हैं और पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र सिद्ध होंगे। उन्होंने वन विभाग से आग्रह किया कि आगामी वन महोत्सव की कार्ययोजना में चिनार के वृक्षारोपण को प्राथमिकता देकर मंडी को और अधिक हरा-भरा, सुंदर तथा पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।






