सरकाघाट अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने से मरीज परेशान, अल्ट्रासाउंड मशीन बनी शोपीस
अल्ट्रासाउंड मशीन बनी शोपीस, गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित
(रितेश चौहान, अनंत ज्ञान – सरकाघाट):
सरकाघाट सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। सत्तापक्ष के दावों के बावजूद अस्पताल में गायनेकोलॉजिस्ट, सर्जन, ईएनटी विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
अस्पताल में आवश्यक मशीनें और बुनियादी सुविधाएं होने के बावजूद विशेषज्ञों के अभाव में उनका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा। खासतौर पर अल्ट्रासाउंड मशीन रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में बेकार पड़ी है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों या बाहरी शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर जांच और इलाज के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
सरकाघाट सिविल अस्पताल पर धर्मपुर, भोरंज, सरकाघाट और जोगिंदरनगर क्षेत्र के सैकड़ों गांवों का दबाव रहता है। ऐसे में मरीज उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की है।
वहीं, अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि डॉक्टरों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है और उपलब्ध होते ही तैनाती कर दी जाएगी।
जब अस्पताल में मशीनें हैं, भवन है, लेकिन डॉक्टर नहीं—तो सवाल सीधा है: आखिर जिम्मेदारी किसकी है? मरीजों की बढ़ती परेशानी अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल बन चुकी है।






