महिला आरक्षण बिल पर हिमाचल में सियासी संग्राम, भाजपा की रैली के बाद कांग्रेस का तीखा हमला
शिमला में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा द्वारा गुरुवार को निकाली गई आक्रोश रैली के बाद अब कांग्रेस ने जोरदार पलटवार किया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे पर “राजनीतिक ड्रामा” करने का आरोप लगाया है।
दरअसल, एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी ने शिमला में महिला आरक्षण बिल के समर्थन में रैली निकाली थी। इस दौरान भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया और खुद को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का समर्थक बताया।
इसके जवाब में हर्षवर्धन चौहान ने भाजपा के प्रदर्शन को “नौटंकी” करार देते हुए कहा कि पार्टी खुद को महिलाओं की सबसे बड़ी हितैषी दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही होती, तो 46 साल में एक भी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया।
चौहान ने कहा कि महिला आरक्षण बिल सबसे पहले 1997 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा लोकसभा में लाया गया था, जिसका उस समय भाजपा ने विरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में बिल को दोबारा लाया गया और सभी दलों ने इसका समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद इसे 2024 चुनाव में लागू नहीं किया गया और 2029 तक टाल दिया गया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पांच राज्यों के चुनावों को देखते हुए भाजपा ने इस मुद्दे को फिर से उछाला है। उनका कहना है कि भाजपा को पहले से पता था कि बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, जो उसके पास नहीं है, फिर भी विशेष सत्र बुलाकर इसे राजनीतिक हथियार बनाया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि शिमला की रैली में पहली बार महिलाओं को मंच पर जगह दी गई, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। चौहान के मुताबिक भाजपा सहानुभूति हासिल करने के लिए यह सब कर रही है और उसकी मंशा महिलाओं को वास्तविक आरक्षण देने की नहीं है।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में पार्टी ने पहले भी तीन महिलाओं को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जबकि भाजपा ने चार दशकों में एक बार भी किसी महिला को इस पद पर नहीं बैठाया। इससे भाजपा की कथनी और करनी का अंतर साफ नजर आता है।












