हिमाचल में बढ़ी पेट्रोल-डीजल की खपत, पर्यटन सीजन में 11% तक उछली मांग
दुनिया भर में जारी क्रूड ऑयल संकट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच हिमाचल प्रदेश में पर्यटन सीजन ने ईंधन की मांग को नई रफ्तार दे दी है। प्रदेश में बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने और कृषि गतिविधियों के तेज होने से पेट्रोल और डीजल की खपत में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल की मांग में करीब 11 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा समय में प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1500 किलोलीटर पेट्रोल और 2400 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की जा रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मांग को देखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है ताकि कहीं भी ईंधन की कमी की स्थिति पैदा न हो।
तेल विपणन कंपनियों ने बताया कि पर्यटन सीजन के चलते प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वाहनों की आवाजाही तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा कई राज्यों में कृषि सीजन और कटाई कार्यों के कारण भी पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़ी है। कंपनियों के अनुसार खुदरा ईंधन आउटलेट्स पर उपभोक्ताओं की बढ़ती आवाजाही के कारण अतिरिक्त दबाव बना है, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने संयुक्त रूप से कहा है कि देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। कंपनियां राज्य प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाकर ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। साथ ही रसद और वितरण योजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
तेल कंपनियों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर अनावश्यक खरीदारी न करें और सामान्य तरीके से ही ईंधन खरीदें। कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार में किसी प्रकार की कमी नहीं है और उपभोक्ता केवल अधिकृत एजेंसियों और तेल कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।






