खलियार वार्ड में कौल सिंह का दांव सफल, भतीजे प्रवीण को टिकट; अलकनंदा का पत्ता कटा
मंडी नगर निगम चुनाव में प्रत्याशियों के चयन को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच खलियार वार्ड नंबर-1 की तस्वीर आखिरकार साफ हो गई है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर अपने भतीजे और अधिवक्ता प्रवीण कुमार ठाकुर को टिकट दिलाने में सफल रहे हैं। इस फैसले के साथ ही चार बार की पार्षद और कांग्रेस प्रवक्ता अलकनंदा का टिकट कट गया, जिससे शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
कई दिनों तक चला सस्पेंस
खलियार वार्ड के टिकट को लेकर पिछले कई दिनों से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। एक तरफ अनुभवी अलकनंदा का मजबूत राजनीतिक आधार था, तो दूसरी ओर कौल सिंह ठाकुर की सियासी पकड़। दोनों गुटों के बीच खींचतान इतनी बढ़ गई थी कि मामला शिमला से लेकर दिल्ली तक पहुंच गया। सिफारिशों और लॉबिंग का दौर लंबा चला, और अंतिम सूची जारी होने तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई थी।
कौल सिंह का प्रभाव पड़ा भारी
आखिरकार टिकट की जंग में कौल सिंह ठाकुर का प्रभाव भारी पड़ा और उन्होंने अपने भतीजे प्रवीण ठाकुर को मैदान में उतार दिया। इसे पार्टी के भीतर उनके वर्चस्व की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, अलकनंदा जैसे वरिष्ठ चेहरे की अनदेखी ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
‘किंगमेकर’ बन सकता है खलियार वार्ड
नगर निगम के गठन के दौरान खलियार वार्ड की सीमाओं में बदलाव करते हुए बिजणी क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया था। यही कारण है कि इस बार यह वार्ड ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ रहा है। खास बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस—दोनों ही दलों ने बिजणी क्षेत्र से जुड़े चेहरों पर दांव खेला है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
मुकाबला हुआ और रोचक
भाजपा पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी थी, और अब कांग्रेस ने भी प्रवीण कुमार ठाकुर को मैदान में उतारकर चुनाव को ‘बिजणी बनाम बिजणी’ बना दिया है। इससे खलियार वार्ड का चुनाव अब बेहद कांटे का और प्रतिष्ठा से जुड़ा मुकाबला बन गया है।
अलकनंदा का टिकट कटना बना चर्चा का केंद्र
लगातार चार बार पार्षद रहने के बावजूद अलकनंदा को इस बार टिकट नहीं मिलना शहर में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। पार्टी भले ही इसे “नए चेहरे को मौका” देने का फैसला बता रही हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे कौल सिंह ठाकुर की रणनीतिक जीत के रूप में देख रहे हैं।
अब असली परीक्षा बाकी
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रवीण ठाकुर अपने ताया के राजनीतिक कद के अनुरूप जनता का विश्वास जीत पाएंगे? या फिर अलकनंदा समर्थकों की नाराजगी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करेगी?
खलियार वार्ड का चुनाव अब सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, प्रभाव और संगठन की ताकत की असली परीक्षा बन चुका है।












