शिमला में 918 दिन का संघर्ष बेअसर, नहीं जागा सिस्टम-दृष्टिहीन संघ ने किया अर्धनग्न प्रदर्शन
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार को दृष्टिहीन संघ का आंदोलन एक बार फिर उग्र रूप लेता नजर आया। अपनी लंबित मांगों को लेकर संगठन के सदस्यों ने प्रदेश सचिवालय के बाहर शर्टलेस होकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और चक्का जाम कर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की। पिछले 918 दिनों से लगातार जारी इस आंदोलन ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है।
बैकलॉग भर्ती को लेकर लंबी लड़ाई
संगठन का कहना है कि दिव्यांगजनों के लिए लंबित बैकलॉग भर्तियों को भरने की मांग को लेकर वे लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह उनका 30वां चक्का जाम है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं, फिर भी उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
“सरकार बातचीत को भी तैयार नहीं”
संगठन के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को सुनने तक की पहल नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि वे संविधान द्वारा मिले अधिकारों के तहत रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार न तो समाधान दे रही है और न ही बातचीत के लिए आगे आ रही है।
सीएम आवास घेराव की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री के साथ लिखित में बैठक का आश्वासन नहीं दिया गया, तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। साथ ही, आंदोलन को और तेज करते हुए प्रदेशभर से दिव्यांगजनों को शिमला बुलाया जाएगा।
कठोर कदम उठाने की चेतावनी
संगठन ने चेताया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे नग्न प्रदर्शन जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। यहां तक कि आत्मदाह जैसी चरम स्थिति से भी पीछे नहीं हटने की बात कही गई है।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जिस तरह अन्य विभागों में भर्तियां की जा रही हैं, उसी प्रकार दिव्यांगजनों के लिए लंबित पदों को भी जल्द भरा जाए, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक रोजगार मिल सके।












