हिमाचल में बढ़ता शहरीकरण बना खतरे की घंटी, क्लाउडबर्स्ट पर CM सुक्खू की बड़ी चेतावनी
शिमला। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में बढ़ते शहरीकरण और पर्यावरणीय असंतुलन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि हिमाचल की पहाड़ियों पर मंडरा रहा क्लाउडबर्स्ट का खतरा अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर द्वारा संपादित पुस्तक ‘City Limits – The Crisis of Urbanization’ के विमोचन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को प्रकृति ने स्वच्छ हवा, पानी और खूबसूरत पर्यावरण जैसे अनमोल संसाधन दिए हैं, लेकिन तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रकृति पर बढ़ते दबाव ने पहाड़ी राज्यों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का सामूहिक दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने शिमला के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि जहां कभी घने जंगल हुआ करते थे, वहां आज बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। सीमित भू-क्षेत्र और बढ़ती आबादी को देखते हुए अब वर्टिकल कंस्ट्रक्शन समय की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
सीएम सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार क्लाउडबर्स्ट की बढ़ती घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करवा रही है। उन्होंने कहा कि पहले ये घटनाएं केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन अब निचले इलाकों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। सिराज क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मौसम और पर्यावरण में हो रहे बदलाव भविष्य के लिए गंभीर संकेत हैं।
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में उन्होंने पहले ही आगाह किया था कि आने वाले वर्षों में क्लाउडबर्स्ट और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों तक भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
राजधानी शिमला के लिए सरकार कई बड़ी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। शहर में बिजली और अन्य तारों को भूमिगत करने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड डक्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा सब्जी मंडी क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जबकि लिफ्ट क्षेत्र के समीप अंडरपास निर्माण की योजना भी प्रस्तावित है। राजधानी में 24 घंटे पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए 800 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना पर तेजी से कार्य चल रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने भी शहरीकरण और पर्यटन को लेकर बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक और अव्यवस्था के लिए केवल पर्यटकों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। स्थानीय लोगों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। पार्किंग सुविधा न होने के बावजूद कई लोग अनेक वाहन खरीद रहे हैं, जिससे शहरों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि स्कूल समय में लगने वाले ट्रैफिक जाम के लिए पर्यटकों से ज्यादा हिमाचल में पंजीकृत वाहन जिम्मेदार होते हैं। न्यायमूर्ति चौहान ने कहा कि राज्य को अब पूर्ण संस्थागत जवाबदेही की जरूरत है, क्योंकि शहरीकरण केवल जनसंख्या बढ़ने का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया बन चुका है।






