CBSE मॉडल पर संकट! स्कूलों में शिक्षक नहीं, अब तक हजारों छात्र बदल चुके स्कूल
हिमाचल सरकार के सरकारी स्कूलों को CBSE पैटर्न में बदलने के फैसले का असर अब छात्रों पर पड़ने लगा है। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में देरी के चलते प्रदेश के 158 सरकारी CBSE स्कूलों से 2217 विद्यार्थियों ने नाम वापस लेकर दूसरे सरकारी और निजी स्कूलों में दाखिला ले लिया है। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने पूरी रिपोर्ट सचिव शिक्षा राकेश कंवर को सौंप दी है।
सरकार अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि शिक्षकों की नियुक्ति चयन परीक्षा की मेरिट के आधार पर होगी या किसी अन्य प्रक्रिया से। हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है, जिससे स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था को लेकर असमंजस बना हुआ है।
शिक्षकों की नियुक्ति के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। समिति ने चयन परीक्षा की मेरिट के आधार पर भर्ती की सिफारिश की है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इन स्कूलों में 82,717 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जिनमें 11,721 छात्र निजी स्कूलों से आए थे। हालांकि शिक्षकों की कमी और अनिश्चितता के कारण 2217 विद्यार्थियों ने दोबारा स्कूल छोड़ दिए। सबसे अधिक छात्रों ने शिमला के पोर्टमोर स्कूल से नाम वापस लिया है।
वहीं शिक्षा विभाग का दावा है कि अंग्रेजी और गणित विषय के 800 शिक्षकों सहित अधिकांश रिक्त पद भर दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि सरकारी CBSE स्कूलों में शिक्षकों की नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।






