SJVNL से वापस होंगी 3 बड़ी परियोजनाएं, डुग्गर-किशाऊ पर बदली सरकार की रणनीति
हिमाचल सरकार ने राज्य के जलविद्युत संसाधनों से अधिकतम आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। इसी सोच के तहत्मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को पूर्व में एसजेवीएनएल को आवंटित की गई 382 मेगावाट सुन्नी, 210 मेगावाट लुहरी चरण-1 और 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, "जलविद्युत हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के समृद्ध जलविद्युत संसाधनों का अधिकतम लाभ यहां की जनता को सुनिश्चित करना है। सरकार प्रदेश के लोगों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों से प्रदेश का उचित हिस्सा हासिल करने और जनहित में इनके बेहतर इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठा रही है।"
हिमाचल को होगी 600 करोड़ की आय
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एनएचपीसी द्वारा विकसित की जा रही 500 मेगावाट डुग्गर जलविद्युत परियोजना की शर्तों एवं नियमों पर दोबारा बातचीत करने के भी निर्देश दिए क्योंकि एनएचपीसी ने परियोजना में बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने 422 मेगावाट किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े पिछले आठ वर्षों से लंबित गतिरोध को भी समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत प्रदेश को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। इससे प्रदेश को हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।






