हिमाचल में चुनाव से पहले तेज हुआ सियासी वार-पलटवार, BJP की चार्जशीट, कांग्रेस का श्वेत पत्र तैयार
शिमला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले सियासी टकराव तेज होने लगा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा अब विकास कार्यों और सरकार के कामकाज से आगे बढ़कर एक-दूसरे के शासनकाल का पूरा हिसाब जनता के सामने रखने की तैयारी में जुट गए हैं। भाजपा ने जहां सुक्खू सरकार के खिलाफ आरोपों की चार्जशीट तैयार करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की समिति गठित कर दी है, वहीं कांग्रेस पिछली जयराम ठाकुर सरकार के पांच साल के कार्यकाल को लेकर श्वेत पत्र लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति आरोप-प्रत्यारोप और पुराने फैसलों की पड़ताल के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ सकती है।
भाजपा ने 15 जुलाई को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल की अध्यक्षता में चार्जशीट समिति का गठन किया था। इस समिति में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसदों, विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य सुक्खू सरकार के कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं, अधूरे चुनावी वादों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जानकारी जुटाना है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार के खिलाफ सामने आने वाले सभी मामलों को दस्तावेजों और तथ्यों के साथ तैयार किया जाएगा तथा इन्हें आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया जाएगा।
भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पहले जनता से किए कई वादे पूरे नहीं किए हैं। पार्टी का दावा है कि सरकार के कार्यकाल में प्रदेश पर आर्थिक दबाव बढ़ा है और कई विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। भाजपा चार्जशीट के माध्यम से इन मुद्दों को एक साथ सामने लाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
वहीं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी भाजपा को उसी के कार्यकाल का हिसाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के पांच वर्षों के शासन को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की घोषणा की है। इसके लिए अगली कैबिनेट बैठक में समिति गठित किए जाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से पिछली भाजपा सरकार के दौरान लिए गए फैसलों, प्रदेश की आर्थिक स्थिति, कर्ज, विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को श्वेत पत्र के जरिए जनता के सामने रखने की तैयारी है। कांग्रेस का तर्क है कि मौजूदा सरकार को विरासत में मिली आर्थिक स्थिति और पिछली सरकार के फैसलों की वास्तविक तस्वीर भी जनता के सामने आनी चाहिए।
हिमाचल की राजनीति में चार्जशीट और पुरानी सरकारी फाइलों को लेकर टकराव कोई नया नहीं है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछली सरकार के फैसलों की समीक्षा, जांच और मुकदमों के साथ राजनीतिक बदले के आरोप भी लगते रहे हैं। सत्ता में रहने वाली पार्टी जहां इसे भ्रष्टाचार और जवाबदेही से जोड़ती है, वहीं विपक्ष अक्सर ऐसी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देता रहा है।
इस बार भी भाजपा ने अपने नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों और सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक बदले से जोड़ते हुए सुक्खू सरकार पर निशाना साधा है। हाल ही में भाजपा ने शिमला में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। भाजपा का आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा से उसके शासनकाल का हिसाब देने की मांग कर रही है।
आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह सियासी जंग और तेज होने के आसार हैं। खासकर 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में चार्जशीट, श्वेत पत्र, आर्थिक स्थिति, सरकारी योजनाओं, लंबित वादों और पूर्व सरकार के फैसलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। चुनावी साल के करीब आते ही दोनों दल इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं।
ऐसे में हिमाचल की राजनीति में अब सवाल केवल मौजूदा सरकार के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि पिछली और वर्तमान दोनों सरकारों के कामकाज का हिसाब-किताब जनता के सामने रखने का बनता जा रहा है। आने वाले महीनों में चार्जशीट और श्वेत पत्र दोनों ही प्रदेश की चुनावी राजनीति के बड़े हथियार बन सकते हैं।






