वेतन न मिलने से ग्राम रोजगार सेवक खफा, बैठक में जताई चिंता, सहायक आयुक्त एवं विकास खंड अधिकारी सदर को सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर में जिला ग्राम रोजगार सेवकों की बैठक का आयोजन किया गया। ग्राम रोजगार सेवकों ने लगातार वेतन न मिलने की समस्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और इस संबंध में सहायक आयुक्त एवं विकास खंड अधिकारी सदर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि प्रदेश में 1034 ग्राम रोजगार सेवक हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2008 में मनरेगा योजना के अंतर्गत की थी और तब से वे मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, पंचायत सचिवों के समान वेतनमान दिए जाने के बावजूद ग्राम रोजगार सेवकों को मेडिकल रीइंबर्समेंट, ग्रेच्युटी, एनपीएस/ओपीएस, अर्जित अवकाश जैसे अन्य वित्तीय लाभों से वंचित रखा गया है। सेवकों ने बताया कि उन्हें पूर्व में मिलने वाला महंगाई भत्ता और वार्षिक इंक्रीमेंट जनवरी 2023 से बंद कर दिया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो गई है। वर्तमान में अधिकांश ग्राम रोजगार सेवकों को 4 से 5 महीने से वेतन नहीं मिला है, जिसके चलते उनके लिए परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
बोले- समय पर नहीं मिलता वेतन, घर चलाना भी मुश्किल
सेवकों ने कहा कि उन्हें तीन से चार माह के अंतराल में वेतन मिलता है, जो अनुचित है। ग्राम रोजगार सेवक संघ ने इस विषय में कई बार सरकार और विभाग से मांग की है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब उन्हें ग्रामीण विकास विभाग के रिक्त पदों में समायोजित किया जाए। संघ ने मुख्यमंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री से आग्रह किया है कि इस गंभीर मुद्दे को आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में सम्मिलित करते हुए ग्राम रोजगार सेवकों की समस्या का हल किया जाए। बैठक की अध्यक्षता राज्य कार्यकारिणी उपाध्यक्ष राकेश शर्मा ने की। इस अवसर पर जिला बिलासपुर अध्यक्ष संदीप कुमार, सुभाष शर्मा, राजेश कुमार, राकेश कुमार, राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक उपस्थित रहे।












