यहां ब्यास नदी फिर से बरपा सकती है कहर
जिला कुल्लू के पतलीकूहल स्थित माहिली में ब्यास नदी फिर से कहर बरपा सकती है, यहां पर किसानों की प्रमुख संस्था कुल्लू फलोत्पादक मंडल और माहिली गांव एक बार फिर ब्यास नदी के खतरे में हैं। नदी का पानी पूरी तरह से मंडल परिसर की ओर मुड़ गया है और अभी से यह परिसर को छूते हुए बह रहा है, जैसे-जैसे मानसून में जलस्तर बढ़ेगा, यह पानी मंडल के परिसर में घुसकर इमारत को भी नुकसान पहुंचाएगा। पिछले साल भी बाढ़ से मंडल परिसर का कुछ हिस्सा बह गया था और पानी पूरे परिसर में घुस गया था। हालांकि, मंडल भवन के पास एक निजी कंपनी का सीए स्टोर था, जिसने मंडल के भवन और प्रयोगशाला को बचा लिया, लेकिन स्टोर का लगभग आधा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था।
कुल्लू फलोत्पादक मंडल खतरे में
कुल्लू फलोत्पादक मंडल बागवानों को फफूंदनाशक, कीटनाशक, प्लास्टिक क्रेट, किल्टे, कार्टन, ट्रे आदि बिना किसी लाभ-हानि के उपलब्ध कराता है। मंडल द्वारा यह सामग्री उपलब्ध कराने से बाजार मूल्यों पर भी अंकुश रहता है, जिससे बागवानों को लाभ मिलता है। मंडल की अपनी मिट्टी और पत्ती विश्लेषण प्रयोगशाला भी है, जहां मंडल क्षेत्र के किसानों और बागवानों की मिट्टी और पत्तों की निशुल्क जांच की जाती है। ब्यास में बार-बार बाढ़ आने से कुछ क्रेट वॉल बह गई हैं और कुछ गिर चुकी हैं।
माहिली गांव को खतरा
यदि ब्यास में फिर से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, तो मंडल परिसर के साथ पूरा माहिली गांव ब्यास के पानी की चपेट में आ जाएगा। माहिली गांव और मंडल परिसर की सुरक्षा के लिए सरकार और प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन खेद का विषय है कि अभी तक इसकी सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा कोई भी उचित कदम नहीं उठाया गया है।
तत्काल सुरक्षा उपाय की मांग
मंडल और गांव की सुरक्षा के लिए समय रहते आरसीसी की दीवार और क्रेटवॉल लगाने की सख्त जरूरत है, ताकि इसे बाढ़ के पानी से बचाया जा सके। साथ ही, पानी का रुख भी बाएं तट से हटाकर बीच में किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके विपरीत, नदी के दाएं तट पर इस साल सरकार द्वारा सुरक्षा दीवार लगाई गई है, लेकिन नदी के बाएं तट पर काम तो नहीं हुआ है, बल्कि पानी का सारा रुख इसी ओर मोड़ दिया गया है, अगर बाढ़ का पानी परिसर में घुसता है, तो मंडल के साथ-साथ पूरे माहिली गांव को भी खतरा है।
सरकार को लिखा पत्र: प्रेम शर्मा
कुल्लू फलोत्पादक मंडल के प्रधान प्रेम शर्मा ने कहा कि मंडल ने इस विषय से अवगत कराने के लिए सरकार को पत्र लिखा है और मांग की है कि ब्यास के पानी को बीच में किया जाए। उन्होंने बताया कि मंडल परिसर के साथ ही माहिली गांव बसा हुआ है और मंडल भवन ने बाढ़ में कई बार इस गांव को बचाया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. राजा वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए मंडल और माहिली गांव को बचाने के लिए 10 लाख रुपए क्रेटवॉल लगाने के लिए दिए थे। इसके साथ ही हिमाचल सरकार के पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने भी 20 लाख रुपए की राशि क्रेटवॉल लगाने के लिए दी थी। हालांकि, ब्यास में लगभग हर वर्ष आ रही बाढ़ ने इन्हें काफी नुकसान पहुंचाया है, जिस कारण ये क्रेटवॉल अब बाढ़ को झेलने में असमर्थ हैं। शर्मा ने सरकार से मंडल परिसर और पूरे माहिली गांव को उजडऩे से बचाने के लिए जल्द आरसीसी की दीवार का निर्माण कार्य आरंभ करने का आग्रह किया है।












