राधा स्वामी सत्संग ब्यास परौर पर गंभीर आरोप: पहाड़ काटे, जलधाराओं में डाला मलबा, NGT रिपोर्ट ने खोली पोल
कांगड़ा। विशेष रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास के विस्तार कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HP SPCB) द्वारा 25 अप्रैल 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में सौंपी गई रिपोर्ट ने कई गंभीर पर्यावरणीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का खुलासा किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सत्संग परिसर के विस्तार के लिए बड़े स्तर पर पहाड़ों की कटाई की गई, लेकिन इसके लिए न तो आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई और न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से निर्माण संबंधी मंजूरी हासिल की गई। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर किए गए इस अनियोजित निर्माण ने पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को खतरे में डाल दिया है।
35 हरे पेड़ों की कटाई, सिर्फ 5 हजार का जुर्माना
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि निर्माण कार्य के दौरान 35 हरे-भरे पेड़ों को बिना अनुमति काट दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े उल्लंघन पर प्रशासन की ओर से महज 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह जुर्माना पेड़ों की वास्तविक कीमत और पर्यावरणीय नुकसान के मुकाबले बेहद मामूली है।
जलस्रोतों में फेंका गया मलबा, गांवों पर संकट
स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों के बाद एनजीटी ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि पहाड़ों की कटाई से निकला भारी मलबा घनेटा, धोरन, बल्ला और दरांग गांवों के प्राकृतिक जलस्रोतों—ताहल खड्ड और शी नाले—में डाला गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे क्षेत्र के जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं और आने वाले समय में पेयजल संकट गहराने की आशंका है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मलबा जमा होने से प्राकृतिक जलधाराओं का प्रवाह बाधित हुआ है।
कमजोर सुरक्षा दीवारें, मानसून में बड़ा खतरा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संयुक्त समिति के निरीक्षण में पाया गया कि नाले के किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवारें तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर ये दीवारें मलबे का दबाव नहीं झेल पाएंगी।
विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो क्षेत्र में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और भारी तबाही जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुली पोल
जांच में उपग्रह (सैटेलाइट) तस्वीरों का भी सहारा लिया गया। इन तस्वीरों में साफ दिखाई दिया कि निर्माण कार्य के दौरान प्राकृतिक जलधाराओं के साथ छेड़छाड़ की गई है। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में बहाव को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन जमीनी हकीकत और सैटेलाइट तस्वीरें अलग कहानी बयां कर रही हैं।
नोटिस के बावजूद नहीं रुका काम
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पालमपुर टाउन प्लानिंग विभाग द्वारा कई बार चेतावनी और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा। 7 अप्रैल 2026 को हुए दोबारा निरीक्षण में भी सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर पाए गए। इसके बाद बोर्ड ने 10 और 17 अप्रैल को नए नोटिस जारी किए।
अब संगठन को पूरे प्रभावित क्षेत्र की बहाली के लिए जियो-टैग तस्वीरों सहित विस्तृत कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीणों में रोष, जमीन हड़पने के आरोप
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संगठन द्वारा दबाव बनाकर जमीनें खरीदी या कब्जाने की कोशिश की गई। इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी निगाहें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की अगली सुनवाई और संभावित कड़े रुख पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए गए, तो यह मामला हिमाचल में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बन सकता है।






