सवारियों से भरी एचआरटीसी की पुरानी खटारा बस को सुंदरनगर बस अड्डा में सुधारने की कोशिश में लगे मैकेनिक
सरकारी महकमे की बसों के पहिए कब कहां थम जाए कोई भरोसा नहीं रह गया है ऐसे में मरीज, विद्यार्थी और अन्य कई क्षेत्रों में जुड़े लोगों को बार बार की इस आफत से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। फिर एक बार अगर एक नज़र सुंदरनगर बस डिपो पर डाली जाए तो इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि एक बड़े रुटों पर चलने वाली पुरानी खटारा बसों का अचानक चलते चलते खड़े हो जाना कोई नई बात नहीं है। एचआरटीसी सुंदरनगर की पुरानी बसों का मर्ज ठीक होने का नाम नहीं ले रहा है बल्कि यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब यह रोग असाध्य सा हो गया है इस परिवहन सेवा के चलते चलते रुकने का सिलसिला लंबा हो चला है यानि खासतौर पर लोकल रूट पर चलाई जा रही पुरानी बसें जिन्हें खटारा नाम दिया गया है सवारियां ढोते-ढोते हांफ चुकी हैं और मझधार में अटकी पड़ी हैं। बार बार की धक्का स्टार्ट बसें जो जबरदस्ती चलाई जा रही हैं यात्रियों की सुविधा के लिए भारी परेशानी का सबब बनती जा रही हैं। कुछ इसी प्रकार का संकट उस समय पैदा हो गया यानि सुंदरनगर से संबंधित बस की खस्ताहालत उस समय एक बार फिर जगजाहिर हो गई जब सुंदरनगर के नए बस अड्डा में ही सवारियों भरी सुंदरनगर से ब्रौहग सरचा जाने वाली वाया जै देवी, रोहांडा, पंडार, चरखड़ी बस जो बहुत पुरानी बताई जा रही है बस अडडा से ही टस से मस नहीं हुई और सवारियां मन मसोस कर इसकी मरम्मत देख देरी की स्थिति में संबंधित विभाग और सरकार को कोसने के लिए मजबूर दिखी क्योंकि बिचलित इन खटारा बसों को जबरदस्ती ही धकेला जा रहा है, जो राम भरोसे हो गई हैं। प्रभावित लोगों व बुद्धीजीवी लोगों ने दु:खी मन से बताया कि एचआरटीसी की बस सेवा से वे उस समय कठिन पहाड़ी भौगौलिक स्थिति में स्वयं को दुर्भाग्यपूर्ण पाते हैं जब पहले से लेट चल रही पुरानी खटारा बसों के फुल स्टाप होने से वे इन बस नाम की रह गई सुखमय सेवा में कैद होकर रह जाते हैं। यह चक्का जाम और अधिक समय तक न चले इसके लिए लोगों ने डी सी मंडी से पुरजोर गुहार लगाई है कि शीघ्र ही एचआरटीसी की बस सेवा को पारदर्शी बनाने के लिए पुरानी खटारा बसों के स्थान पर नई ढंग की बस सेवा के लिए ठोस उपाय किए जाएं।












