सैहब कर्मियों की हड़ताल से हजारों घरों में कूड़ा जमा, अब आउटसोर्स होगी शहर की सफाई व्यवस्था
राजधानी शिमला में सैहब सोसायटी कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिसके चलते शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। हजारों घरों से पिछले तीन दिनों से कूड़ा नहीं उठ पाया है, जिससे शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार सुबह सैहब कर्मचारियों ने सीटीओ चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी वेतन बढ़ोतरी से जुड़ी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
जानकारी के अनुसार, शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रहे सैहब सोसायटी के 800 से अधिक कर्मचारी लगातार तीसरे दिन भी काम पर नहीं लौटे। नगर निगम प्रशासन की ओर से एजीएम बुलाने और मांगों पर चर्चा का भरोसा दिए जाने के बावजूद कर्मचारी यूनियन ने हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है।
सफाई व्यवस्था आउटसोर्स करने की तैयारी
उधर, नगर निगम शिमला ने शहर की सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों के माध्यम से वार्ड स्तर पर सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। ये कर्मचारी घर-घर से कूड़ा एकत्र कर कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाएंगे, जबकि वहां से नगर निगम अपने वाहनों के जरिए कूड़े को भरयाल प्लांट तक पहुंचाएगा।
बताया जा रहा है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो 20 मई के बाद शहर में नई सफाई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
“पहले मांगें पूरी करो, फिर काम पर लौटेंगे”
सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि नगर निगम पहले कर्मचारियों की मांगें पूरी करे, उसके बाद ही कर्मचारी काम पर लौटेंगे। उन्होंने कहा कि एजीएम बुलाने की सूचना केवल फोन पर दी गई है, जबकि कोई लिखित पत्राचार नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कर्मचारियों के साथ गंभीरता से बातचीत करने के बजाय केवल औपचारिकताएं निभा रहा है। जसवंत सिंह ने कहा कि कर्मचारी पूरी तरह एकजुट हैं और मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।






