बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष-सदस्य भी लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव, सरकार ने दूर किया ‘लाभ के पद’ का भ्रम
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए साफ कर दिया है कि बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष और सदस्य पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह पात्र हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन पदों को “लाभ का पद” नहीं माना जाएगा, इसलिए ऐसे व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि यह निर्णय विधि विभाग से परामर्श के बाद लिया गया है। पत्र के अनुसार बाल कल्याण समिति एक सांविधिक एवं अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है, लेकिन वे नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं होते। उन्हें केवल सम्मान राशि या बैठक शुल्क दिया जाता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्य (अयोग्यता निवारण) अधिनियम, 1971 के तहत ऐसे पदों को छूट प्राप्त है। वहीं हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 के अनुसार भी इन पदों पर कार्यरत व्यक्तियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा।
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद अब बाल कल्याण समितियों में कार्यरत अध्यक्ष और सदस्य बिना किसी कानूनी अड़चन के पंचायत चुनावों में भाग ले सकेंगे। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में भी अपनी भागीदारी निभाना चाहते हैं।
यह निर्देश प्रदेश के सभी जिला पंचायती राज अधिकारियों, उपायुक्तों, ब्लॉक विकास अधिकारियों और राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिए गए हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का भ्रम न रहे।






