परिसीमन से बदलेंगे राजनीतिक समीकरण, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन में 8 वार्डों में आंशिक बदलाव
सोलन नगर निगम में हाल ही में हुए परिसीमन से 17 में से आठ वार्डों की जनसंख्या में मामूली बदलाव हुआ है। इससे आने वाले निकाय चुनाव में राजनितिक समीकरण बदलने की संभावना है। इसको लेकर कांग्रेस समर्थित स्थानीय नेताओं के एक वर्ग ने आपत्ति जताई है। नगर निगम चुनावों से पहले अनिवार्य इस प्रक्रिया ने संभावित पार्षदों के बीच चिंता पैदा कर दी है क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता है कि इसका उनकी चुनावी संभावनाओं पर क्या असर पड़ेगा। परिसीमन के मुताबिक शहर के तीन वार्डों-कथेड़, ठोडो ग्राउंड और शिल्ली रोड-में जनसंख्या में कमी आई है, जहां कुछ क्षेत्रों को आस-पास के वार्डों में पुन: आवंटित किया गया है। इसके विपरीत, पांच वार्डों में आस-पास के इलाकों को जोडऩे के कारण जनसंख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें चंबाघाट सलोगड़ा, लोअर बाजार, जवाहर पार्क, चौंरीघाटी और मधुबन कॉलोनी शामिल हैं। शेष 9 वार्डों-देऊघाट, सपरून, रेलवे स्टेशन, डिग्री कॉलेज, सनी साइड, कलीन, हाउसिंग बोर्ड, तहसील पातरार, रबौन, आंजी और बसाल पट्टी कथेड़ की जनसंख्या के आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। यह पुनर्गठन 2020 में शुरू किए गए परिवर्तनों का ही एक हिस्सा है, जब आठ पंचायतों को सोलन एमसी में मिलाकर, इसे नगर निगम में अपग्रेड किया गया था। युक्तिकरण प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, अधिकारियों ने कुछ ब्लॉकों के हिस्सों को पड़ोसी वार्डों में स्थानांतरित कर दिया है, जिससे जनसंख्या के आंकड़ों में तदनुसार बदलाव किया गया है। परिसीमन के बाद, सनी साइड वार्ड की जनसंख्या अब सबसे कम 2,512 है, जबकि लोअर बाजार की जनसंख्या सबसे अधिक 3,068 है। जनवरी 2026 में अगले नगर निकाय चुनाव होने हैं, इसलिए इस फेरबदल ने स्थानीय राजनीतिक उम्मीदवारों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जिनमें से कुछ कथित तौर पर संशोधित सीमाओं और मतदाता गतिशीलता को लेकर रातों की नींद हराम कर रहे हैं।
2011 की जनगणना के आंकड़ों पर किया परिसीमन
सोलन की एसडीएम डॉ. पूनम बंसल ने बताया कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया गया है क्योंकि तब से कोई नई जनगणना नहीं हुई है। हालांकि, यह वर्तमान जनसांख्यिकीय परिदृश्य को नहीं दर्शाता है, लेकिन अधिकारियों को उपलब्ध आंकड़ों पर ही निर्भर रहना पड़ा। परिसीमन का मसौदा 28 मई को प्रकाशित किया गया था और जनता से इसके प्रकाशन के सात दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कराने को कहा गया है। अपने मतदाता आधार के प्रभावित होने की चिंता में कई राजनीतिक नेताओं ने पहले ही आपत्तियां दर्ज कराना शुरू कर दिया है।












