सुक्खू सरकार ने मेडिकल टीचर्स की छुट्टियों पर चलाई 'कैंची', नई अवकाश नीति से बढ़ा विवाद
शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों को मिलने वाले एकेडमिक लीव में कटौती कर दी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब मेडिकल शिक्षकों को पहले की तरह 20 दिन के बजाय केवल 8 दिन का शैक्षणिक अवकाश ही मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत यह अवकाश विश्वविद्यालयों, संस्थानों में आयोजित सम्मेलनों, परीक्षा ड्यूटी और निरीक्षण संबंधी कार्यों के लिए लिया जा सकेगा। साथ ही इन अवकाशों के दौरान यात्रा भत्ता (TA/DA) और अन्य खर्चों का वहन भी अब राज्य सरकार नहीं करेगी।
सरकार ने नए नियुक्त होने वाले सहायक प्रोफेसरों के लिए भी अवकाश नियमों में बदलाव किया है। 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद नियुक्त होने वाले मेडिकल शिक्षकों को वर्षभर में कुल 35 दिन का अवकाश मिलेगा, जिसमें 7 दिन का ग्रीष्मकालीन और 28 दिन का शीतकालीन अवकाश शामिल होगा। इसके साथ ही अर्जित अवकाश (EL) को भी 30 दिनों से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है। हालांकि यह नई व्यवस्था केवल 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद नियुक्त होने वाले सहायक प्रोफेसरों पर ही लागू होगी। इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकार के इस फैसले का मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने इसे शिक्षकों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। इसी क्रम में IGMC मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर नई अवकाश नीति पर आपत्ति दर्ज करवाई है।
नई अधिसूचना के बाद प्रदेश के मेडिकल शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के बीच टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।






