देयोरी स्कूल भवन उद्घाटन पर सियासत: जयराम ठाकुर ने प्रियंका गांधी के नाम पर लगाया देरी का आरोप
शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के देयोरी स्कूल भवन के उद्घाटन में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों की सुविधा और अभिभावकों की मांगों को नजरअंदाज कर राजनीतिक कारणों से विद्यालय के उद्घाटन को टाल दिया गया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि देयोरी क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। वर्तमान में विद्यालय की सात कक्षाएं किराये के मात्र चार कमरों में संचालित हो रही हैं, जिससे विद्यार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को दो नालों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है और वे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और अभिभावकों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए स्कूल का बहुमंजिला भवन तैयार कर लिया गया है, लेकिन भवन निर्माण पूरा होने के बावजूद पिछले सात महीनों से उसका उद्घाटन नहीं हो पाया है। जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो विद्यालय किसी "दिव्य मुहूर्त" के इंतजार में खड़ा हो।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि शिक्षा मंत्री स्वयं बच्चों की समस्याओं और स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ विद्यालय का उद्घाटन करना चाहते थे, लेकिन राजधानी से फोन आने के बाद कार्यक्रम को रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे विद्यालय का उद्घाटन नहीं कर सकते और कार्यक्रम स्थगित कर दिया जाए।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विद्यालय के उद्घाटन में देरी के पीछे राजनीतिक कारण हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कार्यक्रम को इसलिए रोका गया ताकि भविष्य में इसका उद्घाटन कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी की उपस्थिति में कराया जा सके।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भवन पूरी तरह तैयार है और बच्चे कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, तो केवल राजनीतिक श्रेय लेने के लिए उद्घाटन को टालना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालय भवन को तत्काल छात्रों के लिए समर्पित किया जाना चाहिए।






