पंचायत भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन! अब निजी लोगों पर भी गिरेगी गाज; DC को मिले सख्त अधिकार
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायतों में विकास कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने अधिसूचना जारी कर सभी जिलों के उपायुक्तों (डीसी) को हिमाचल प्रदेश प्रिवेंशन ऑफ स्पेसिफिक करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट, 1983 के तहत रिपोर्ट जारी करने का सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी तथा तेज होने की उम्मीद है।
सरकार के इस निर्णय की सबसे अहम बात यह है कि अब केवल पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन निजी व्यक्तियों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा सकेगा जो किसी भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या अवैध लाभ के मामले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल पाए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति पंचायत के विकास कार्यों में गड़बड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग या नियमों के विपरीत किसी कार्य में सहयोगी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासु द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय विभाग की 18 फरवरी, 2026 को जारी पूर्व अधिसूचना के क्रम में लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित जिले के उपायुक्त अब ऐसे मामलों में लिखित रिपोर्ट जारी करेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
सरकार का मानना है कि पंचायतों में हर वर्ष विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के धन के सही उपयोग को सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। कई बार यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ मामलों में निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से विकास कार्यों में अनियमितताएं, फर्जी भुगतान और सरकारी धन का दुरुपयोग किया जाता है। नई अधिसूचना के बाद ऐसे मामलों में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करना आसान होगा।
सरकार के इस कदम को पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और विकास कार्यों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सख्त पहल माना जा रहा है। इससे पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों की निगरानी और प्रभावी होने के साथ-साथ सरकारी धन के दुरुपयोग पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।






