बदहाल HRTC! टायर ही नहीं, सरकाघाट में 20 और धर्मपुर डिपो में 8 बसें खड़ी, दर्जनों रूट प्रभावित
सरकाघाट। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। प्रदेश के सरकाघाट और धर्मपुर डिपो में टायरों तथा आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी के कारण परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। हालत यह है कि सरकाघाट डिपो की करीब 20 बसें टायर न मिलने के कारण खड़ी हैं, जबकि धर्मपुर डिपो की 8 बसें भी विभिन्न तकनीकी कारणों से संचालन से बाहर हो चुकी हैं।
बसों की कमी का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण और लंबी दूरी के रूट प्रभावित हुए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन व्यवस्था भी चरमरा गई है। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को झेलनी पड़ रही है जो रोजाना शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए HRTC बसों पर निर्भर हैं।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकाघाट-दिल्ली रूट पर चलने वाली बस फिलहाल केवल चंडीगढ़ तक ही संचालित की जा रही है। इसके अलावा लुधियाना समेत कई अन्य महत्वपूर्ण रूट भी प्रभावित हुए हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवाएं सीमित होने से लोगों को निजी वाहनों या महंगे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
उधर, धर्मपुर-हरिद्वार रूट पर चल रही एक HRTC बस तकनीकी खराबी आने के बाद देहरादून के नेपाली फार्म के समीप रास्ते में ही खड़ी हो गई। इससे यात्रियों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी और यात्रा बीच रास्ते में बाधित हो गई।
यात्रियों में बढ़ रही नाराजगी
लगातार प्रभावित हो रही बस सेवाओं को लेकर यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि निगम की लापरवाही और संसाधनों की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां परिवहन के अन्य साधन सीमित हैं।
क्या बोले क्षेत्रीय प्रबंधक?
HRTC सरकाघाट के क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार ने बताया कि टायरों और कुछ आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण कई बसों का संचालन प्रभावित हुआ है। निगम स्तर पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे ही टायर और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध होंगे, बंद पड़ी बसों को दोबारा रूटों पर उतार दिया जाएगा और प्रभावित सेवाओं को जल्द बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
फिलहाल यात्रियों की मांग है कि निगम और सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि प्रदेश के ग्रामीण और लंबी दूरी के रूटों पर सामान्य परिवहन व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सके।






