अनारक्षित पदों पर आरक्षित वर्ग की कट-ऑफ नहीं होगी लागू, हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी पद को अनारक्षित (Unreserved/General) श्रेणी के लिए विज्ञापित किया गया है, तो उस पद पर चयन के लिए सभी अभ्यर्थियों पर अनारक्षित वर्ग का ही योग्यता मापदंड लागू होगा। ऐसे पदों पर एससी, एसटी या अन्य आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आरक्षित श्रेणी की न्यूनतम कट-ऑफ का लाभ नहीं मिल सकता।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
मामला वर्ष 2017 में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश द्वारा निकाली गई गैर-शिक्षण पदों की भर्ती से जुड़ा है। विश्वविद्यालय ने अपर डिविजन क्लर्क (UDC) के दो पद पूरी तरह अनारक्षित श्रेणी के लिए विज्ञापित किए थे। एससी वर्ग के एक अभ्यर्थी का नाम पहले चयन सूची में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक त्रुटि बताते हुए संशोधित सूची जारी की, जिसमें उसका नाम हटा दिया गया।
विश्वविद्यालय ने अदालत को बताया कि पहली सूची में अभ्यर्थी का नाम मानवीय भूल के कारण शामिल हो गया था। पात्रता की दोबारा जांच के बाद गलती सामने आने पर संशोधित सूची जारी की गई, जिसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं थी।
हाईकोर्ट ने माना कि लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 8 अंक, जबकि एससी/एसटी वर्ग के लिए 6 अंक निर्धारित थे। लेकिन चूंकि यूडीसी के दोनों पद अनारक्षित थे, इसलिए सभी अभ्यर्थियों के लिए 8 अंकों की पात्रता अनिवार्य थी। अदालत ने कहा कि आरक्षित वर्ग की छूट केवल आरक्षित पदों पर लागू होती है, अनारक्षित पदों पर नहीं।






