पट्टे की जमीन पर किसानों का अधिकार होगा सुनिश्चित, देरी करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज
शिमला: हिमाचल प्रदेश में दशकों पहले पट्टे पर दी गई जमीनों का मालिकाना हक पाने का इंतजार कर रहे हजारों किसानों और बागवानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राजस्व विभाग में फाइलों को वर्षों तक लंबित रखने और अनावश्यक देरी की व्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पट्टे की जमीन से जुड़े पात्र मामलों का इंतकाल (म्यूटेशन) निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर देरी या लापरवाही बरती गई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों-बागवानों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश
सचिवालय में भुट्टी, थानाधार, कोटगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे किसानों और बागवानों ने वर्षों से लंबित इंतकाल मामलों को लेकर अपनी समस्याएं राजस्व मंत्री के समक्ष रखीं। उन्होंने बताया कि कई परिवार 50 वर्षों से अधिक समय से पट्टे की जमीन पर खेती और बागवानी कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें कानूनी मालिकाना हक नहीं मिल सका।
शिकायतें सुनने के बाद मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने उप तहसील कोटगढ़ के तहसीलदारों से कहा कि पात्र मामलों के इंतकाल अगले कुछ दिनों के भीतर निपटाए जाएं और लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
सरकार की मंशा साफ, वास्तविक कब्जाधारकों को मिलेगा अधिकार
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उन वास्तविक किसानों और बागवानों को कानूनी मालिकाना हक दिलाना है, जिन्हें वर्षों पहले पट्टे पर जमीन आवंटित की गई थी। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे होने के बावजूद यदि किसी का इंतकाल लंबित है तो उसे बिना देरी पूरा किया जाए।
मंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कोटगढ़ क्षेत्र के लोगों को पट्टे से जुड़े रिकॉर्ड और मुसब्बी जैसे जरूरी दस्तावेज लेने के लिए रामपुर न जाना पड़े। इसके लिए संबंधित राजस्व कार्यालयों में ही पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों का समय और धन दोनों बच सकें।
52 साल बाद मिलेगी जमीन की मालिकी!
बैठक के दौरान मैलन गांव के रतन चंद ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके पिता को वर्ष 1974 में 3 बीघा 18 बिस्वा जमीन पट्टे पर मिली थी, लेकिन 52 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें उसका मालिकाना हक नहीं मिला। मंत्री के निर्देश के बाद अब सोमवार को उनकी जमीन का इंतकाल कर मालिकाना हक देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
रतन चंद ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी जमीन से सड़क निकालने के लिए राजस्व अधिकारियों द्वारा उन पर शपथ पत्र देने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि यही उनकी एकमात्र जमीन है और सड़क बनने से करीब एक से डेढ़ बीघा भूमि प्रभावित होगी। इस पर राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी किसान पर जबरन शपथ पत्र देने का दबाव न बनाया जाए।
अब जल्द निपटेंगे वर्षों से लंबित इंतकाल
राज्य सरकार का कहना है कि वर्षों पहले पट्टे पर दी गई जमीनों के मामलों की दस्तावेजों के आधार पर विधिवत जांच की जा रही है और पात्र किसानों-बागवानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य दशकों से जमीन पर काबिज वास्तविक लाभार्थियों को उनका वैधानिक मालिकाना हक दिलाकर लंबित मामलों का स्थायी समाधान करना है।
सरकार के सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि वर्षों से फाइलों में अटके हजारों इंतकाल मामलों का जल्द निपटारा होगा और पात्र किसानों-बागवानों को उनकी जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिल सकेगा।






