बिलासपुर के माइनिंग प्रभावित स्कूलों में AI क्रांति, स्मार्ट क्लास और टैबलेट से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल शुरू होने जा रही है। माइनिंग प्रभावित क्षेत्रों के पांच सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग और स्मार्ट टैबलेट जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को भी शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध करवाई जाए।
पांच स्कूलों को मिलेंगे 20-20 लाख रुपये
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि बरमाणा और कोलडैम क्षेत्र के पांच सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों के लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (DMF) के तहत 20-20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से स्कूलों में डिजिटल शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
AI डैशबोर्ड और स्मार्ट क्लास से होगी पढ़ाई
योजना के तहत स्कूलों में स्मार्ट पैनल, टैबलेट, डिजिटल क्लासरूम और AI डैशबोर्ड लगाए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार बेहतर सीखने का अवसर मिलेगा और शिक्षक भी बच्चों की प्रगति का आकलन कर सकेंगे।
छोटी कक्षाओं के बच्चों पर रहेगा फोकस
इन स्कूलों में आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को विशेष रूप से तकनीक से जोड़ा जाएगा। प्रशासन का मानना है कि शुरुआती स्तर पर डिजिटल शिक्षा मिलने से बच्चों की नींव मजबूत होगी और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे।
'पढ़ाई विद AI' के बाद नई पहल
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि जिले में पहले ही 'पढ़ाई विद AI' पहल शुरू की गई थी, जिसके तहत 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को जेईई, आईआईटी और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब प्रशासन का लक्ष्य छोटे बच्चों को भी पर्सनलाइज्ड एडेप्टिव लर्निंग की सुविधा उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने बताया, "हमने माइनिंग अफेक्टेड एरिया के पांच स्कूलों को चिह्नित किया है। इन स्कूलों में स्मार्ट पैनल, टैबलेट, स्मार्ट क्लासरूम और AI डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। अगर इसके अच्छे परिणाम सामने आते हैं तो जिले के अन्य स्कूलों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा।"
माइनिंग प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा का नया मॉडल
AI और डिजिटल शिक्षा की यह पहल आने वाले समय में बिलासपुर के सरकारी स्कूलों के लिए एक नया मॉडल साबित हो सकती है। इससे ग्रामीण और माइनिंग प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थी भी आधुनिक शिक्षा की दौड़ में आगे बढ़ सकेंगे। बरमाणा क्षेत्र में सीमेंट उद्योग और कोलडैम क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं के कारण इन क्षेत्रों को माइनिंग प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि उद्योगों से मिलने वाले विकास लाभ को स्थानीय बच्चों तक पहुंचाना जरूरी है।






