कांगड़ा में महिलाओं के भूमि अधिकारों की हकीकत: सिर्फ 18% घर महिलाओं के नाम, 67% नहीं पढ़ पातीं जमीन के दस्तावेज
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में महिलाओं के भूमि एवं संपत्ति अधिकारों को लेकर किए गए एक विस्तृत अध्ययन ने लैंगिक असमानता की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। पर्वतीय महिला विकास ट्रस्ट द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि कानूनी अधिकार मिलने के बावजूद भूमि स्वामित्व, विरासत और पारिवारिक निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी अब भी सीमित है।
कांगड़ा की 10 पंचायतों में 302 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में 73 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। अध्ययन के अनुसार 76 प्रतिशत घरों का स्वामित्व पुरुषों के नाम पर है, जबकि केवल 18 प्रतिशत संपत्तियां महिलाओं के नाम दर्ज हैं। नई संपत्तियों की खरीद में भी पुरुषों का दबदबा देखने को मिला, जहां 77 प्रतिशत खरीद पुरुषों के नाम पर हुई, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 17 प्रतिशत रही।
विरासत संबंधी सोच में भी असमानता साफ दिखाई दी। 32 प्रतिशत लोगों ने पैतृक संपत्ति का मुख्य उत्तराधिकारी पुत्र को माना, जबकि केवल 13 प्रतिशत लोगों ने बेटियों को प्राथमिक उत्तराधिकारी बताया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि परिवार की 63 प्रतिशत संपत्ति पुरुष मुखियाओं के नाम दर्ज है, जबकि विधवा महिलाओं के नाम पर केवल 16 प्रतिशत संपत्ति है।
परिवार के महत्वपूर्ण फैसलों में भी पुरुषों का प्रभाव अधिक पाया गया। 37 प्रतिशत मामलों में पति को प्रमुख निर्णयकर्ता माना गया, जबकि केवल 20 प्रतिशत मामलों में महिलाओं की स्वतंत्र भूमिका सामने आई।
अध्ययन में महिलाओं के लिए एक और बड़ी चुनौती कानूनी जागरूकता की कमी बताई गई है। 67 प्रतिशत महिलाएं भूमि संबंधी दस्तावेज पढ़ने और समझने में सक्षम नहीं हैं, जबकि केवल 4 प्रतिशत महिलाओं ने कभी भूमि अधिकारों से जुड़े किसी जागरूकता शिविर में भाग लिया है।
रिपोर्ट में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय की महिलाओं की स्थिति को और अधिक चिंताजनक बताया गया है। सर्वेक्षण में शामिल एसटी महिलाओं में केवल 17 प्रतिशत के पास ही घर का स्वामित्व पाया गया।
अध्ययन में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है। कई परिवारों ने भूस्खलन, फसल क्षति और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती, पशुपालन और यहां तक कि अपनी जमीन व आवास तक गंवाने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर भूमि अधिकार रखने वाली महिलाओं पर प्राकृतिक आपदाओं का असर सबसे अधिक पड़ता है।
रिपोर्ट में महिलाओं की कानूनी जागरूकता बढ़ाने, भूमि दस्तावेजों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने, पंचायत स्तर पर सहायता तंत्र विकसित करने और पुनर्वास नीतियों में महिलाओं के भूमि अधिकारों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
इस रिपोर्ट पर शिमला में आयोजित चर्चा में पर्वतीय महिला विकास ट्रस्ट की संस्थापक रजनी व्यास, अध्यक्ष विमल विश्व प्रेमी, एकल नारी संगठन की संस्थापक निर्मल चंदेल, वरिष्ठ पत्रकार अर्चना फुल्ल और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी शामिल हुईं। विद्या नेगी ने कहा कि महिलाओं को भूमि एवं संपत्ति अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए आयोग विशेष जागरूकता शिविर आयोजित करेगा।






