बिजली बोर्ड के ढांचे से छेड़छाड़ कर विद्युत प्रणाली को किया जा रहा कमजोर
प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के हमीरपुर इकाई का सम्मेलन शुक्रवार को मटनसिद्ध मे यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामेश्वर दत्त शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इस अवसर पर यूनियन के महासचिव हीरा वर्मा के अतिरिक्त अन्य पदाधिकारी मुनीष महाजन, नंद लाल शर्मा, अमित सूद, विनोद कुमार, पंकज कुमार, पंकज परमार, कनव राणा, मुनी लाल ठाकुर, अमित भरोहटा, हरिश शर्मा आदि उपस्थित रहे। इस दौरान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष व महासचिव ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रमों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि आज बिजली बोर्ड प्रबंधन बोर्ड में तरह-तरह के प्रयोग करने में लगा है जिससे इसकी कार्यप्रणाली बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा आज बिजली बोर्ड में जहां नई भर्तिया बंद पड़ी हैं, वहीं बिजली बोर्ड के ढांचे से छेड़छाड़ कर इसको कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने बिजली बोर्ड के पास 66 केवी से ऊपर की विद्युत प्रणाली जिसमें मटनसिद्ध का विद्युत ढांचा भी सम्मिलित है, उसके रखरखाव के कार्यों को प्रदेश संचार निगम को देने का विरोध किया और कहा इससे जहां बिजली आपूर्ति बनाए रखने में तकनीकी दिक्कतें रहेंगी, वहीं बोर्ड के कर्मचारियों की सेवा शर्तें भी प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा आज बिजली बोर्ड कर्मचारियों के अभाव से जूझ रहा है और पिछले तीन वर्ष से बिजली बोर्ड में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई। बोर्ड में 1030 टीमेट के पदों की भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2023 में शुरू की गई, लेकिन अभी तक मामला फाइल में लटका पड़ा है। वहीं जेओए भर्ती से बोर्ड के लिए चयनित होकर आए 150 उम्मीदवार को बोर्ड में ज्वॉइनिंग देने से मना कर दिया है ऐसे में यह ढांचा कार्यरत कर्मचारियों को चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि नई भर्तियां न करने से कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ा है, जिससे प्रदेश में अब तक 45 कर्मचारी डयूटी के समय शहीद हो गए हैं। उन्होंने सरकार से बोर्ड में तुरंत विभिन्न श्रेणियों के खाली पड़े पदों ओर नियमित भर्ती करने की मांग की है और बोर्ड में युक्तिकरण के नाम पर चल रही पदों की कटौती पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने हैरानी जताई कि बिजली बोर्ड कर्मचारियों को अभी तक पुरानी पेंशन से वंचित रखा है जबकि बिजली बोर्ड में भी सरकारी कर्मचारी की तरह वर्ष 1974 से पेंशन रूल-1972 लागू है। इसके सभी संशोधन बोर्ड में लागू हुए जबकि पुरानी पेंशन बारे किऐ गए संशोधन को ही बोर्ड में लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बिजली बोर्ड में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को बिजली बोर्ड में समायोजित करने के लिए एक स्थाई नीति बनाने की मांग की है।












