शहरी निकाय चुनाव मामला पहुंचा हाईकोर्ट, अध्यक्ष चयन नियमों में बदलाव पर सरकार को नोटिस
हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन के लिए सात दिन की अनिवार्यता खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने नियमों में बदलाव कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है। पहले प्रावधान था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के सात दिन के भीतर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन किया जाएगा, लेकिन अब इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बदलाव से राजनीतिक जोड़तोड़ और देरी की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। वहीं सरकार की ओर से इस फैसले को प्रशासनिक प्रक्रिया और परिस्थितियों के अनुसार लिया गया कदम बताया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से जवाब मांगा है। अब इस मुद्दे पर अगली सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि इसका असर कई नगर निकायों में अध्यक्ष पद के समीकरणों पर पड़ सकता है।






