कन्सा खड्ड में बेरोकटोक अवैध खनन, दहशत और खतरे के साये में जी रहे ग्रामीण
गहरी खाइयों में तब्दील हुई खड्ड, पानी का स्तर गिरा; घरों तक पहुंचा खनन, प्रशासन पर चुप्पी के आरोप
महेंद्र राणा, अनंत ज्ञान, भौर
कन्सा खड्ड में वर्षों से जारी अवैध खनन अब आसपास के गांवों के लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। डीनक, डुगराईं, रड़ू, छलखी, ढाबन और पाटा गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध खनन ने खड्ड को जगह-जगह गहरी खाइयों में बदल दिया है, जिससे पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है और बरसात के दिनों में खड्ड पार करना जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई लोग बरसात में इन गहरी खाइयों में डूब चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पहले खनन केवल खड्ड तक सीमित था, लेकिन अब मशीनें और टिप्पर लोगों के घरों के समीप तक पहुंच गए हैं, जिससे मकानों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है। लोगों का कहना है कि दिन-रात चल रही मशीनों और वाहनों के शोर से पूरा क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में है, जबकि प्रकृति का संतुलन भी लगातार बिगड़ रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर एक प्रकृति प्रेमी ने बताया कि अवैध खनन बिना मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता और यही कारण है कि वर्षों से यह धंधा बेरोकटोक जारी है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी कभी मौके पर लोगों की समस्याएं सुनने नहीं पहुंचे और न ही खनन के दुष्प्रभावों को लेकर कोई जागरूकता अभियान चलाया गया।
क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने उपायुक्त मंडी और मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद कंगना रनौत से मांग की है कि समय रहते अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।






