NIT हमीरपुर का कमाल: अंडे के छिलकों से जुडेंगी टूटी हड्डियां, दोहरी सर्जरी से मिलेगी राहत
हमीरपुर: फ्रैक्चर के इलाज में अब मरीजों को महंगी और दोहरी सर्जरी से राहत मिल सकती है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) हमीरपुर के विद्यार्थियों ने एक ऐसा बायोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड (हड्डी सहायक रॉड) विकसित किया है, जो शरीर में हड्डी को ठीक होने तक सहारा देने के बाद धीरे-धीरे खुद ही घुल जाएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके बाद रॉड निकालने के लिए किसी दूसरी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अंडे के छिलकों से बना हड्डी जैसा पदार्थ
इस नवाचार में अंडे के छिलकों का उपयोग कर उनसे कैल्शियम कार्बोनेट निकाला गया, जिसे ऑर्थोफॉस्फोरिक एसिड के साथ रिएक्शन कर हाइड्रॉक्सीएपेटाइट तैयार किया गया। यह वही प्रमुख तत्व है जो मानव हड्डियों में पाया जाता है।
इसके बाद इसे जिलेटिन और काइटोसैन से बने बायोपॉलीमर मैट्रिक्स के साथ मिलाकर माइनस 55 डिग्री सेल्सियस पर प्रोसेस किया गया, जिससे एक मजबूत और जैव-संगत संरचना तैयार हुई।
कैसे काम करेगा यह स्कैफोल्ड?
यह तैयार संरचना हड्डी के भीतर एक सपोर्ट सिस्टम यानी “स्कैफोल्ड” की तरह काम करेगी। समय के साथ यह शरीर में प्राकृतिक रूप से अवशोषित हो जाएगा, जिससे मरीज को इंप्लांट निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन नहीं कराना पड़ेगा।
लागत और मौजूदा इलाज की तुलना
मौजूदा टाइटेनियम रॉड आधारित इलाज:
- रॉड की कीमत: लगभग ₹15,000
- कुल दोहरी सर्जरी का खर्च: ₹1 से ₹2 लाख तक
- रॉड निकालने के लिए दूसरी सर्जरी अनिवार्य
नया बायोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड:
- अनुमानित लागत: ₹4,000 से ₹5,000
- दूसरी सर्जरी की आवश्यकता नहीं
- मरीज को कम दर्द, कम जोखिम और कम खर्च
छात्रों की टीम और मार्गदर्शन
यह प्रोजेक्ट एनआईटी हमीरपुर के मैटीरियल साइंस विभाग के छात्रों सक्षम, कृष, तनिष्क और प्रकृति ने तैयार किया है। इन्हें फैकल्टी इंचार्ज डॉ. विक्रम वर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
टेकफेस्ट में मिली सराहना
इस नवाचार को संस्थान के टेकफेस्ट “निंबस” में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे काफी सराहना मिली। छात्रों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में ऑर्थोपेडिक इलाज को अधिक सुरक्षित, सस्ता और प्रभावी बना सकती है।
संस्थान का दृष्टिकोण
एनआईटी हमीरपुर की रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना नानोटी ने कहा कि विद्यार्थियों के ऐसे नवाचारों को इंडस्ट्री से जोड़कर आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि इनका लाभ समाज तक पहुंच सके।












