सोलन की ‘लाइफ लाइन’ बनी पिकनिक स्पॉट, पर्यटकों की मस्ती से गंदा हो रहा अश्वनी खड्ड का पानी
सोलन: देशभर में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के बीच मैदानी इलाकों से बड़ी संख्या में पर्यटक हिमाचल प्रदेश का रुख कर रहे हैं। ठंडी वादियों और प्राकृतिक स्थलों का आनंद लेने के लिए सैलानी हिमाचल के पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर पर्यटकों की लापरवाही अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। ऐसा ही मामला सोलन जिले की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी चायल के साधुपुल क्षेत्र से सामने आया है, जहां पर्यटकों की मस्ती अब हजारों लोगों की पेयजल सुरक्षा पर खतरा बनती नजर आ रही है।
दरअसल, साधुपुल के पास बहने वाली अश्वनी खड्ड से सोलन, शिमला और सिरमौर के कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। यही अश्वनी खड्ड सोलन शहर की लाइफ लाइन मानी जाती है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में पर्यटक नदी के भीतर उतरकर नहा रहे हैं, पिकनिक मना रहे हैं और खुलेआम गंदगी फैला रहे हैं। कई पर्यटक नदी के बीच कुर्सियां और टेबल लगाकर घंटों मौज-मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, खाने-पीने का सामान, प्लास्टिक बोतलें और अन्य कचरा सीधे खड्ड में फेंका जा रहा है, जिससे जल स्रोत दूषित होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा कई बार अश्वनी खड्ड क्षेत्र में धारा 144 लागू की जा चुकी है। नदी किनारे बड़े-बड़े बोर्ड और चेतावनी होर्डिंग भी लगाए गए हैं, जिनमें साफ तौर पर नदी में प्रवेश और पर्यटन गतिविधियों पर रोक की बात लिखी गई है। इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों पर्यटक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खड्ड में उतर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर निगरानी और सख्ती की कमी के कारण पर्यटक लगातार मनमानी कर रहे हैं।
इस मामले पर एसडीएम कंडाघाट गोपाल शर्मा ने कहा कि पुलिस समय-समय पर साधुपुल क्षेत्र में गश्त करती है और प्रशासन द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं कि कोई भी व्यक्ति नदी में प्रवेश नहीं करेगा। बावजूद इसके लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में और सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा पुलिस प्रशासन को लगातार गश्त बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि अश्वनी खड्ड का पानी दूषित होता है तो इसका सीधा असर सोलन शहर की बड़ी आबादी पर पड़ेगा। बताया जा रहा है कि सोलन शहर के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में पेयजल आपूर्ति इसी जल स्रोत से होती है। ऐसे में यदि पानी में बैक्टीरिया या प्रदूषण बढ़ता है तो 50 हजार से अधिक लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि गर्मियों के मौसम में पानी में बैक्टीरिया फैलने का खतरा अधिक रहता है।
बता दें कि चायल और साधुपुल क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी अब पर्यावरण और जल सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में सोलन में पेयजल संकट और गहरा सकता है।
अब सवाल यह है कि आखिर प्रशासन के आदेशों के बावजूद अश्वनी खड्ड में पर्यटकों की एंट्री क्यों नहीं रुक पा रही? और क्या हजारों लोगों की पेयजल सुरक्षा को बचाने के लिए प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह लापरवाही आगे चलकर बड़े संकट का रूप लेगी।






