4 साल का इंतजार, 28 गवाह और आखिरकार इंसाफ: प्राची राणा हत्याकांड में आसिफ मोहम्मद को उम्रकैद
ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बहुचर्चित प्राची राणा हत्याकांड में अदालत ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। स्पेशल जज ऊना नरेश ठाकुर की अदालत ने 15 वर्षीय छात्रा प्राची राणा की निर्मम हत्या के आरोपी आसिफ मोहम्मद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
चार साल पहले हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
यह मामला 5 अप्रैल 2022 का है, जिसने पूरे हिमाचल प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। अंब उपमंडल के प्रतापनगर में रहने वाली दसवीं कक्षा की छात्रा प्राची राणा उस दिन घर पर अकेली थी। उसकी छोटी बहन स्कूल गई हुई थी, जबकि माता-पिता अपने-अपने कार्यस्थलों पर थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अखबार वितरित करने वाला आसिफ मोहम्मद दोपहर करीब एक बजे प्राची के घर पहुंचा और पेपर कटर से उसका गला काटकर बेरहमी से हत्या कर दी। शाम को जब प्राची की मां अनुपमा घर लौटीं तो उन्होंने बेटी को घर के डाइनिंग हॉल में खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़ा पाया। इस हृदयविदारक दृश्य ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
एक गवाह की सूचना बनी केस की सबसे बड़ी कड़ी
घटना के बाद पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू की। शुरुआती दौर में मामला काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन दो दिन बाद जांच को अहम मोड़ मिला। एक प्रवासी मजदूर ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उसने घर के अंदर से एक बच्ची के चीखने की आवाज सुनी थी। उसने एक अखबार बांटने वाले युवक को घर से बाहर निकलते हुए भी देखा था।
यही सूचना पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुराग साबित हुई। पुलिस ने 7 अप्रैल 2022 को आरोपी आसिफ मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर अंब के पक्का परोह क्षेत्र से हत्या में इस्तेमाल किया गया पेपर कटर भी बरामद कर लिया गया, जिसे उसने वारदात के बाद छिपा दिया था।
28 गवाहों और मजबूत साक्ष्यों ने दिलाई सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 28 गवाह पेश किए। जिला न्यायवादी एकलव्य ने प्रभावी ढंग से पैरवी करते हुए सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को अदालत के समक्ष रखा।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपी को हत्या के अपराध में दोषी पाया। अदालत ने उसे हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा घर में घुसकर अपराध करने और सबूत मिटाने से संबंधित धाराओं के तहत भी दोषी करार दिया गया। इन अपराधों के लिए आरोपी को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
चार साल बाद मिला न्याय, परिवार को मिली राहत
करीब चार वर्षों तक चले इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से न केवल प्राची राणा के परिवार को राहत मिली है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि गंभीर अपराधों के दोषियों को कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दिलाई जा सकती है।
प्राची की दर्दनाक हत्या ने जिस तरह पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, उसी तरह अब अदालत के फैसले ने यह विश्वास मजबूत किया है कि न्याय भले देर से मिले, लेकिन मिलता जरूर है।






