धर्मशाला नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा, ठेकेदारों को किया अधिक भुगतान; करोड़ों की वसूली फंसी
धर्मशाला: धर्मशाला नगर निगम की वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के कई गंभीर मामले उजागर हुए हैं। रिपोर्ट में निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए करोड़ों रुपये की लंबित वसूली, नियमों के विपरीत भुगतान और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है।
ऑडिट जांच के अनुसार नगर निगम ने घर-घर कूड़ा संग्रहण और सफाई व्यवस्था का कार्य संभालने वाले ठेकेदार को अनुबंध से अधिक 7.31 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं सॉलिड और लिगेसी वेस्ट प्रबंधन का काम कर रही कंपनी को भी नियमों को दरकिनार कर 4.05 लाख रुपये अतिरिक्त दे दिए गए। इन भुगतानों पर ऑडिट टीम ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गृहकर, दुकानों के किराये और मोबाइल टावर शुल्क सहित विभिन्न मदों में 956.19 लाख रुपये की वसूली लंबित है। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट रखरखाव से जुड़े 80.78 लाख रुपये के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाए गए, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑडिट टीम ने अपनी जांच में कुल 13 गंभीर अनियमितताओं को चिन्हित किया है। जब इन मामलों पर नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगा गया तो अधिकारियों ने रिकॉर्ड को जल्द दुरुस्त करने और खातों का मिलान करने का आश्वासन दिया।
इस पूरे मामले पर नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर सुरिंदर कुमार ने कहा है कि ऑडिट रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






