पांगी कॉलेज से साइंस और कॉमर्स संकाय बंद, घाटी में बढ़ा रोष; बहाली नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
चंबा। एक ओर प्रदेश सरकार बेहतर और सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के एकमात्र सरकारी कॉलेज से साइंस और कॉमर्स संकाय बंद किए जाने के फैसले ने स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि इस निर्णय से पांगी घाटी के विद्यार्थियों का इन विषयों में स्नातक करने का अधिकार छिन गया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्ष 2007 में स्थापित पांगी कॉलेज उच्च शिक्षा का क्षेत्र का एकमात्र केंद्र है, जहां वर्तमान में करीब 160 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पहले साइंस और कॉमर्स संकायों में 25 से 30 विद्यार्थी पढ़ाई करते थे, लेकिन वर्ष 2023 के बाद इन विषयों के शिक्षकों के पद खाली होने के चलते विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती गई। अब सरकार द्वारा दोनों संकाय बंद किए जाने से छात्रों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पांगी घाटी के लोगों का कहना है कि क्षेत्र वर्ष में लगभग छह माह तक बर्फबारी के कारण देश-दुनिया से कटा रहता है। ऐसे में छात्रों के लिए चंबा, धर्मशाला या अन्य शहरों में जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं है। घाटी से बाहर निकलने के लिए मनाली या जम्मू-कश्मीर के रास्ते करीब 600 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है, जिस पर भारी खर्च आता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह संभव नहीं है।
पांगी निवासी नरेश शर्मा, धर्मेंद्र कुमार, हरीश ठाकुर और सुरेंद्र ने कहा कि पांगी कॉलेज ही घाटी के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करने का एकमात्र सहारा है। ऐसे में साइंस और कॉमर्स विषयों को बंद करना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय है।
वहीं, पांगी सेवियर संस्था के संस्थापक नीरज और अध्यक्ष तमन्ना ने चंबा पहुंचकर सहायक आयुक्त के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में पांगी कॉलेज में बंद किए गए साइंस और कॉमर्स संकायों को तत्काल बहाल करने की मांग की गई है। संस्था और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोनों विषयों को पुनः शुरू नहीं किया गया तो घाटी के लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।






