16वें वित्त आयोग के नए नियम: हिमाचल में अब स्ट्रीट लाइट, टाइलें और छोटे निर्माण कार्यों पर नहीं खर्च होगी अनुदान राशि
शिमला। केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि के उपयोग को लेकर जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब इन संस्थाओं को स्ट्रीट लाइट, बेंच, टाइलें, छोटी मरम्मत, सीमित दायरे के निर्माण कार्य और अन्य स्थानीय स्तर के छोटे विकास कार्यों पर वित्त आयोग की राशि खर्च करने की अनुमति नहीं होगी।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुदान राशि का उपयोग निर्धारित मानकों के विपरीत किया गया तो संबंधित पंचायत समिति या जिला परिषद की अनुदान राशि भी रोकी जा सकती है। इससे स्थानीय निकायों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
पूरे ब्लॉक और जिले को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं पर रहेगा फोकस
केंद्र सरकार ने कहा है कि जिला परिषदों और पंचायत समितियों को अब अपनी भूमिका के अनुरूप ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता देनी होगी, जिनका लाभ केवल किसी एक गांव या वार्ड तक सीमित न होकर पूरे विकास खंड या जिले के बड़े हिस्से को मिले। वित्त आयोग के अनुदान का मुख्य उद्देश्य टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण, आधारभूत ढांचे को मजबूत करना, दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना और सार्वजनिक धन के दोहरे व्यय को रोकना है।
इन कार्यों पर खर्च होगी वित्त आयोग की राशि
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब अनुदान राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक परिसंपत्तियों के विकास, बड़े जल संरक्षण कार्यों, सार्वजनिक संस्थानों के उन्नयन और बहु-ग्रामीण लाभ वाली परियोजनाओं पर किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे विकास कार्यों का दायरा बढ़ेगा और वित्त आयोग के धन का अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होगा।
बदल जाएगी खर्च की प्राथमिकता
अब तक जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट, संपर्क मार्गों की छोटी मरम्मत, नालियां, टाइलें, रेलिंग, बेंच और सामुदायिक भवनों की मरम्मत जैसे कार्यों पर वित्त आयोग का पैसा खर्च कर रहे थे। नए निर्देश लागू होने के बाद ऐसे छोटे विकास कार्य पंचायत स्तर या अन्य योजनाओं के माध्यम से कराए जाएंगे, जबकि जिला परिषदों और पंचायत समितियों को केवल व्यापक जनहित वाली परियोजनाओं पर ही राशि खर्च करने की अनुमति होगी।
15वें वित्त आयोग के तहत मिले थे 3,280 करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण स्थानीय निकायों को कुल 3,280 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। यह राशि आबादी, क्षेत्रफल और वित्त आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर बंधित (टाइड) और अबंधित (अनटाइड) फंड के रूप में आवंटित की गई।
वर्षवार प्राप्त अनुदान राशि
• 2021-22 : ₹620 करोड़
• 2022-23 : ₹640 करोड़
• 2023-24 : ₹660 करोड़
• 2024-25 : ₹670 करोड़
• 2025-26 : ₹690 करोड़
कुल : ₹ 3,280 करोड़
ऐसे हुआ राशि का वितरण
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वितरण फार्मूले के तहत इस अनुदान राशि का तीन स्तरों पर आवंटन किया गया। इसमें ग्राम पंचायतों को 70 से 75 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 15 से 18 प्रतिशत और जिला परिषदों को 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा दिया गया। नए दिशा-निर्देशों के लागू होने के बाद अब इस राशि का उपयोग अधिक व्यापक और दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं पर केंद्रित रहेगा।






