जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती से बचना पड़ेगा भारी, ACS ने मांगी रिपोर्ट; अब CM के समक्ष उठेगा मामला
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती से बचने की प्रवृत्ति अब अधिकारियों और वैज्ञानिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के लाहुल-स्पीति स्थित कुकुमसेरी कृषि अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से वरिष्ठ विज्ञानियों के छह पद खाली पड़े हैं। इन पदों के रिक्त रहने से शोध कार्यों और संस्थान की गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कई बार तैनाती आदेश जारी किए गए, लेकिन कुछ वैज्ञानिक जनजातीय क्षेत्र में जाकर कार्यभार संभालने से बचते रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) आरडी नजीम, जो वर्तमान में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं, ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पहले इन पदों पर नियमित तबादलों के माध्यम से तैनाती की जाती थी। हालांकि, कई अधिकारी और वैज्ञानिक राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर अपने तबादले रुकवा लेते थे। इसके बाद प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थायी तबादले की जगह अस्थायी तैनाती का विकल्प अपनाया, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
हाल ही में एक वरिष्ठ विज्ञानी को कुकुमसेरी कृषि अनुसंधान केंद्र में अस्थायी तौर पर तैनात किया गया था। लेकिन उन्होंने वहां कार्यभार संभालने के बजाय सचिवालय पहुंचकर तैनाती आदेश को रद्द करने का आग्रह किया। उन्होंने सेवानिवृत्ति में कम समय बचने और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए जनजातीय क्षेत्र में जाने में असमर्थता जताई।
अब अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। रिपोर्ट में कुकुमसेरी केंद्र में खाली पदों की संख्या, अब तक वहां तैनात किए गए अधिकारियों और वैज्ञानिकों का विवरण, प्रभावित शोध कार्यों और वर्तमान में चल रही परियोजनाओं की जानकारी शामिल होगी।
सूत्रों के अनुसार, यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष भी प्रस्तुत की जा सकती है। इसके आधार पर जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और भविष्य की तैनाती नीति को लेकर सरकार महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है।
यह मामला केवल कृषि विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है। प्रदेश के कई अन्य विभागों में भी जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती को लेकर कर्मचारियों के बचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सरकार अब ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की तैयारी में है।






