कुल्लू में जंगली मशरूम खाना पड़ा भारी, एक ही परिवार के 8 सदस्य अस्पताल में भर्ती
कुल्लू जिले की लगघाटी के दुर्गम दोघरी गांव में गत बुधवार को जंगली मशरूम खाने से एक ही परिवार के आठ सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई। फूड प्वाइजनिंग के लक्षण सामने आने पर सभी क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ले जाया गया। छह सदस्यों की हालत में सुधार होने पर वीरवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई लेकिन दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है जिस कारण उन्हें आइजीएमसी शिमला रेफर किया गया। परिवार के सदस्य बुधवार को साथ लगते जंगल से मशरूम लेकर आए थे।
66 वर्षीय डोले राम, 28 वर्षीय मोहन लाल, 26 वर्षीय सुरेंद्र, 25 वर्षीय सविता, 24 वर्षीय भगवंतु और नीलम तथा एक वर्षीय माहिरा और जाह्नवी ने जंगली मशरूम की सब्जी खा ली। इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू से माहिरा और जाह्नवी को शिमला रेफर किया गया। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के एमएस डॉ. हीरा लाल ने मामले की पुष्टि की है।
कैसे करें पहचान?
वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी की वनस्पतिशास्त्री एवं एथ्नोबाटनिस्ट डॉ. तारा देवी सेन ने बताया कि जंगली मशरूम सही है या जहरीली, उसकी पहचान केवल उसके रंग, आकार, गंध या स्वाद के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। सही पहचान के लिए मशरूम की छतरी, डंठल व संरचना जैसे कई लक्षणों का परीक्षण आवश्यक है।
जब तक मशरूम की वैज्ञानिक पहचान और जहरीलेपन की पहचान न हो, इन्हें विषैला ही मानना चाहिए। प्रयोगशाला में जांच करवानी चाहिए। केवल वही मशरूम खांऐ जिसकी प्रजाति की पहचान किसी स्थानीय विशेषज्ञ या प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा की जाए।






