उदासीनता : अधर में गोंदपुर बनेहड़ा तालाब का कार्य
सरकार द्वारा प्रशासन को विकास को गति देने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन प्रशासन, ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों के लिए योजना बनाकर उन्हें आरंभ करके विकास कराने के दावों को लेकर गंभीर नहीं दिखता, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण गोंदपुर बनेहड़ा तालाब है, जो कि अपने सुधारीकरण के शुरू हुए कार्य के पूरे होने की प्रतीक्षा कर रहा है। वहीं, इस तालाब का कछुआ गति से चल रहा कार्य दर्शाता है कि किस कदर सरकार के कार्य को चंद विकास विरोधी तत्व अपनी विकास विरोधी सोच के चलते बाधा डालकर प्रभावित करते हैं व प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधि भीगी बिल्ली बनकर उनकी मनमानी को पूरा करने की तरफ ध्यान देता प्रतीत हो रहा है, लेकिन विडंबना यह कि शुरू हुए कार्य के समयावधि तक पूरा होने या न होने की सुध लेना तक उचित नहीं समझते व ब्लॉक स्तर से गांव स्तर तक किस तरह से चलते कार्यों को किस तरह से अधर में लटकाया जाता है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण गोंदपुर बनेहड़ा का महात्मा का बनाया तालाब कहा जा सकता है, जो तीन साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है, जिसके अंदर में लटके कार्य को लेकर सरकारी तंत्र उदासीन व लापरवाह बना हुआ है। बता दें वर्षों से पंचायतों की अनदेखी के चलते सूखा होने के साथ साथ झाडिय़ों व गंदगी का अड्डा बन चुके इस तालाब को लेकर स्थानीय चंद स्वयंसेवी प्रबुद्धजनों ने इस के जीर्णोद्धार के लिए 2016 से लगातार स्वयं तो प्रयास किए व तत्कालीन डीसी ऊना राघव शर्मा का वर्ष 2020 में निवेदन कर मौका पर दौरा कराया। इसके लिए डीसी द्वारा इस तालाब को ब्लॉक की बड़ी योजना डलवाया गया व 22 लाख बजट का प्रावधान किया गया । सरकार के निर्धारित मापदंड के अनुसार कार्य शुरू हुआ। 2021 में शुरू हुआ कार्य अभी पूरा कराने में गगरेट ब्लॉक से लेकर पंचायत तक धरातल पर नाकाम दिखी है। करीब दो माह पहले स्थानीय तालाबों को संरक्षण देने के लिए जागरूकता देने वाली स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधी ने डीसी ऊना को पत्र प्रेषित करके तालाब के कार्य को पूरा कराने की मांग उठाई थी लेकिन अभी तक कोई एक्शन न होना चिंतनीय कहा जा सकता है। बता दें कि आधा अधूरा लटका कर होने के कारण तालाब के एक किनारे पर कचरा, दुर्गंध युक्त पानी जमा होने से गंदगी का वातावरण बना हुआ है, वहीं मलेरिया व डेंगू की आशंका से इनकार नही किया जा सकता। वहीं, पंचायत घर से मात्र 50 मीटर पर गंदगी का आलम बरकरार है। इस बारे ब्लाक स्तर से लेकर सचिव उदासीन बने हुए हैं जिससे लापरवाही उजागर हो रही है। बता दें कि इस कार्य के दौरान पहले पंचायत ने रेलिंग लगाई व कुछ महीने बाद हटा दी व जिसको एक साल से जंक खा रही है। सरकारी योजना को लेकर ब्लॉक स्तर अधिकारी वर्ग की लापरवाही के चलते लटके इस कार्य को लेकर स्वयंसेवी प्रबुद्ध वर्ग ने डीसी ऊना जतिन लाल से मांग की है कि कुंभकर्णी निंद्रामग्न ब्लाक स्तर अधिकारी को बिनादेर कार्य पूरा करने के निर्देश जारी किए जाएं।












