शिमला: सील्ड रोड पर वाहनों को रोकने से भड़के वक़ीलों ने घेरा सचिवालय, सीएम के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन
शिमला। राजधानी शिमला में सील्ड रोड पर अधिवक्ताओं के वाहनों को रोके जाने के विरोध में मंगलवार को हाईकोर्ट के सैकड़ों वकील सड़क पर उतर आए। अधिवक्ताओं ने पहले मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर और फिर सचिवालय का घेराव कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सचिवालय के बाहर धरना-प्रदर्शन के चलते सर्कुलर रोड पर लंबा जाम लग गया, जिससे आम लोगों, पर्यटकों, सरकारी कर्मचारियों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वकीलों का आरोप था कि वे वर्षों से छोटा शिमला-सचिवालय-हाईकोर्ट मार्ग का उपयोग करते आ रहे हैं, लेकिन अब पुलिस उन्हें सील्ड रोड से गुजरने से रोक रही है और कार्ट रोड का इस्तेमाल करने को कह रही है। उनका कहना था कि कार्ट रोड पहले से ही ट्रैफिक दबाव में है, जिससे अदालत पहुंचने में देरी होती है।
प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने "वीआईपी कल्चर नहीं चलेगा" और "अंग्रेजों का कानून नहीं चलेगा" जैसे नारे लगाए। इसी बीच पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जिस वाहन में सवार थीं, उसके सील्ड रोड से गुजरने पर वकीलों ने विरोध जताया। इसके बाद पुलिस ने संबंधित वाहन का ₹1500 का चालान किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ अन्य अधिकारियों के वाहनों को भी रोका गया और नियमों को सभी पर समान रूप से लागू करने की मांग उठाई गई।
बार एसोसिएशन का कहना था कि उनका विरोध केवल परमिट का मुद्दा नहीं, बल्कि सील्ड रोड पर नियमों के समान अनुपालन का भी मामला है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कई ऐसे वाहन भी इन मार्गों का उपयोग कर रहे हैं, जिनके पास वैध परमिट नहीं हैं।
घंटों चले गतिरोध के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक हुई। बैठक के बाद बार एसोसिएशन ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मामले के समाधान के लिए एक कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया है। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अधिवक्ताओं को परमिट जारी किए जाएंगे और इसके लिए नाममात्र शुल्क लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और इसे सकारात्मक पहल बताते हुए सरकार से जल्द समाधान की उम्मीद जताई।






