कसोल रेव पार्टी मामला: हाईकोर्ट की सख्ती बरकरार, डीसी-एसपी को नहीं मिली राहत, जल्द सुनवाई से इनकार
शिमला। कुल्लू जिले के कसोल में कथित रेव पार्टियों के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का सख्त रुख बरकरार है। अदालत ने जिला कुल्लू के डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम के तबादले से जुड़े आदेशों में राहत देने से इनकार करते हुए मामले की पूर्व निर्धारित तारीख से पहले सुनवाई करने की मांग खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अधिकारियों की ओर से दायर आवेदन को नामंजूर करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई तय तिथि 6 अगस्त को ही होगी।
'प्रशासन की मौन सहमति के बिना संभव नहीं'
हाईकोर्ट पहले ही अपनी टिप्पणी में कह चुका है कि स्थानीय प्रशासन की मौन सहमति या मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर रेव पार्टियों का आयोजन संभव नहीं हो सकता। अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम का एक सप्ताह के भीतर तबादला करने के निर्देश दिए थे।
डीएसपी की चेतावनी के बावजूद मिली थी अनुमति
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, 5 जून 2026 को डीएसपी और स्थानीय थाना प्रभारी ने रिपोर्ट देकर बताया था कि आयोजन स्थल घने जंगल में स्थित है, जहां बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और तस्करी की आशंका है। इसके बावजूद अगले ही दिन 6 जून को संबंधित एसडीएम ने आयोजन के लिए तेज आवाज में संगीत बजाने की अनुमति दे दी, जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।
करोड़ों के कारोबार की आशंका
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब 4,000 से 5,000 लोगों की क्षमता वाले आयोजनों में प्रति व्यक्ति 10 हजार से 16 हजार रुपये तक वसूले जाएं और कुछ टिकटों की कीमत 5 से 7 लाख रुपये तक पहुंचे, तो यह स्पष्ट रूप से बड़े व्यावसायिक कारोबार का संकेत है। ऐसे आयोजन प्रशासन की जानकारी के बिना नहीं चल सकते।
एसआईटी जांच के आदेश
हाईकोर्ट ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित करने के निर्देश भी दिए हैं। फिलहाल अदालत की सख्ती जारी है और डीसी, एसपी व एसडीएम को किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।






