बिलासपुर कॉलेज की बड़ी लापरवाही, M.Com. छात्रों को गलत विषय पढ़ाने से मचा हड़कंप
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर में एम.कॉम द्वितीय सेमेस्टर के दर्जनों छात्र-छात्राएं प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। आरोप है कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्रों को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के नियमों के विपरीत गलत विषय पढ़ाया गया। इस चूक का खुलासा तब हुआ जब विद्यार्थियों ने परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू की।
छात्रों के अनुसार, एचपीयू के चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) के तहत एम.कॉम द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को एक ऐसा जेनेरिक इलेक्टिव विषय चुनना होता है, जो कॉमर्स विभाग का न होकर किसी अन्य संकाय, जैसे अर्थशास्त्र, से संबंधित होना चाहिए। लेकिन सत्र की शुरुआत में तत्कालीन वाणिज्य विभागाध्यक्ष ने विद्यार्थियों को कॉमर्स विभाग का ही विषय "ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर एंड डेवलपमेंट (MC-GE-1)" आवंटित कर दिया।
विभागाध्यक्ष के निर्देशों के अनुसार विद्यार्थियों ने पूरे सेमेस्टर इसी विषय की नियमित पढ़ाई की और कक्षाएं भी लगाईं। हालांकि मई 2026 में जब परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब विश्वविद्यालय के पोर्टल पर यह विषय उपलब्ध नहीं था। इसके बाद छात्रों को पूरी स्थिति का पता चला।
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने तत्कालीन विभागाध्यक्ष से संपर्क किया, जिन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए उन्हें अर्थशास्त्र विभाग का विषय "Economics-125: Fundamental Concepts in Economics" भरने की सलाह दी। साथ ही मौखिक रूप से आश्वासन दिया गया कि आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) अंकों की व्यवस्था कर दी जाएगी।
छात्रों ने विभागाध्यक्ष के आश्वासन पर विश्वास करते हुए परीक्षा फॉर्म में इकोनॉमिक्स-125 विषय भर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद संबंधित विभागाध्यक्ष का तबादला राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं हो गया। इसके बाद समस्या और गंभीर हो गई, क्योंकि पूरे सेमेस्टर में अर्थशास्त्र विषय की कोई कक्षा नहीं लगी और न ही उससे संबंधित कोई आंतरिक मूल्यांकन कराया गया।
वहीं, अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षक नियमों का हवाला देते हुए आंतरिक मूल्यांकन अंक देने में असमर्थता जता रहे हैं। उनका कहना है कि विद्यार्थियों ने उनके विभाग में न तो कक्षाएं लगाई हैं और न ही निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी की है। ऐसे में दर्जनों छात्रों के परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इस मामले पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीएस कटवाल ने कहा कि यह मामला कुछ दिन पहले उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कॉमर्स विभाग के शिक्षकों से बातचीत की है और संबंधित प्रोफेसर को तत्काल समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं। प्राचार्य ने दावा किया कि फिलहाल समस्या के समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है तथा जल्द ही कॉमर्स विभाग की बैठक बुलाकर विद्यार्थियों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा।
अब छात्र कॉलेज प्रबंधन और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी एक वर्ष की मेहनत और पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने से बचाया जा सके।






