हिमाचल सरकार फिर लेगी 700 करोड़ का कर्ज, सड़क-स्वास्थ्य-शिक्षा समेत विकास परियोजनाओं पर होगा खर्च
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की विभिन्न विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचा निर्माण कार्यों के लिए खुले बाजार से 700 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने का फैसला किया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार यह राशि 13 वर्ष की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां (Government Securities) जारी कर जुटाएगी। इन प्रतिभूतियों की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से ई-नीलामी के जरिए होगी। नीलामी में बैंक, बीमा कंपनियां, वित्तीय संस्थान और अन्य अधिकृत निवेशक भाग ले सकेंगे।
सरकार के अनुसार, जुटाई गई राशि का उपयोग सड़क, पुल, भवन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के साथ-साथ बजट में स्वीकृत विकास योजनाओं को गति देने के लिए किया जाएगा।
प्रदेश सरकार हर वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार और RBI द्वारा तय उधार सीमा के भीतर चरणबद्ध तरीके से बाजार से ऋण जुटाती है। सरकार का कहना है कि विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और पूंजीगत निवेश बढ़ाने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक है।
हालांकि, नई उधारी के साथ राज्य के कर्ज में भी वृद्धि होगी। सीएजी (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक हिमाचल प्रदेश की कुल देनदारियां और बकाया ऋण 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उधार की राशि का उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण में किया जाता है, तो इससे भविष्य में राज्य की आय बढ़ सकती है। वहीं लगातार बढ़ता कर्ज सरकार के वित्तीय प्रबंधन और ब्याज भुगतान पर अतिरिक्त दबाव भी डाल सकता है।






