हिमाचल में दौड़ेंगी 1000 इलेक्ट्रिक और 200 हाइड्रोजन बसें, मंडी से शुरुआत
हिमाचल प्रदेश में हरित और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी के पड्डल मैदान से जिले के लिए 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी गई हैं, जिनका संचालन शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला समेत कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा चुका है।
एक चार्ज में 180 किमी की रेंज
सुक्खू ने कहा कि टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर करीब 180 किलोमीटर है। वहीं, शिमला-चंडीगढ़ रूट पर एक बार चार्ज करने के बाद बस करीब 270 किलोमीटर तक चल रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों का यह प्रदर्शन भविष्य में इनके विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करता है।
डीजल बसों से 12-13 रुपये प्रति किमी की बचत
मुख्यमंत्री के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से एचआरटीसी की लागत में भी कमी आ रही है। डीजल बसों की तुलना में ऊर्जा लागत में करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे निगम के ईंधन खर्च में कमी के साथ सार्वजनिक परिवहन की दक्षता भी बढ़ रही है।
5 साल में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि सरकार हर साल निगम को करीब 840 करोड़ रुपये का अनुदान देती है, जबकि एचआरटीसी अपने संसाधनों से भी लगभग इतनी ही राशि अर्जित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हिमाचल में 1000 इलेक्ट्रिक और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदी जाएंगी। सरकार का यह कदम 'ग्रीन हिमाचल' की परिकल्पना को आगे बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम साबित होगा।






