शिमला डेंटल कॉलेज में मरीजों से मनमानी वसूली के आरोप, ₹6,700 की जगह ₹14 हजार में इम्प्लांट; दो वरिष्ठ डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस का भी आरोप
हिमाचल प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज में मरीजों से मनमानी वसूली और वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा कथित तौर पर अवैध प्राइवेट प्रैक्टिस करने का गंभीर मामला सामने आया है। कॉलेज के कुछ स्टाफ सदस्यों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य सचिव और मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले की शिकायत की है। शिकायत में पेरियो और ओरल सर्जरी विभाग के दो वरिष्ठ डॉक्टरों पर सरकारी नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सरकार ने गरीब और आम मरीजों की सुविधा के लिए डेंटल इम्प्लांट की फीस 6,700 रुपये निर्धारित की है, लेकिन आरोप है कि मरीजों से प्रति इम्प्लांट 14,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। शिकायत में इम्प्लांट सप्लाई करने वाले एक वेंडर की कथित संलिप्तता का भी आरोप लगाया गया है और दावा किया गया है कि तय रकम से अधिक वसूली के बदले डॉक्टरों को प्रति इम्प्लांट 4,000 से 5,000 रुपये तक नकद कमीशन दिया जाता था। इसके अलावा, एक वेंडर को ओरल सर्जरी विभाग में लॉकर या अलमारी उपलब्ध करवाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में दोनों डॉक्टरों पर सरकारी ड्यूटी के दौरान शिमला के निजी क्लीनिकों में प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोप भी लगाए गए हैं। वहीं, पत्र में ओटी रजिस्टर चोरी की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए दावा किया गया है कि एक इंटर्न को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ा गया था। हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि होना बाकी है।






