बिलासपुर में फोरलेन कंपनी के खिलाफ फूटा ग्रामीणों कागुस्सा, धूल और मुआवजे को लेकर किया प्रदर्शन
बिलासपुर जिला की ग्राम पंचायत राजपुरा में फोरलेन निर्माण कार्य को लेकर लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए शिमला–मंडी-भराड़ी नेशनल हाईवे पर पडलग के समीप जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है, जिससे हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। धूल और मिट्टी के गुबार ने हालात ऐसे कर दिए हैं कि लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। हल्की सी हवा चलते ही पूरा इलाका धूल से भर जाता है, जिससे सांस लेना भी दूभर हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निर्माण कंपनी न तो नियमित रूप से पानी का छिड़काव कर रही है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। रिहायशी इलाकों के बेहद करीब क्रैशर और निर्माण गतिविधियों की अनुमति दिए जाने से प्रदूषण का खतरा और बढ़ गया है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार काम नहीं हो रहा और शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं की जा रही।
मुआवजे को लेकर भी नाराजगी
सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बल्कि जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर भी लोगों में भारी रोष है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार के तय मानकों के मुकाबले उन्हें काफी कम मुआवजा दिया जा रहा है। जहां एक बीघा जमीन की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये होनी चाहिए, वहीं किसानों को मात्र 70 लाख रुपये प्रति बीघा दिए जा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और निर्माण कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित कंपनी की होगी।












