विमल नेगी डेथ केस में बड़ा खुलासा, CBI चार्जशीट में ASI पर सबूत मिटाने का आरोप
शिमला: हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के तत्कालीन मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत मामले में सीबीआई की चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि मामले से जुड़े एक महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य को गायब कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
सीबीआई के अनुसार, विमल नेगी के शव से बरामद एक पेन ड्राइव, जिसमें मामले से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे, कथित तौर पर जांच से जुड़े एएसआई पंकज शर्मा द्वारा गायब कर दी गई। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि इस कार्रवाई से जांच प्रभावित हुई और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसी मामले में सीबीआई ने सितंबर 2025 में पंकज शर्मा को गिरफ्तार भी किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
चार्जशीट में एचपीपीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा और निदेशक (इलेक्ट्रिकल) देशराज पर भी आपराधिक साजिश, पेशेवर प्रताड़ना और एक ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई का कहना है कि पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़े विवादों और लगातार बढ़ते दबाव के कारण विमल नेगी मानसिक रूप से परेशान थे।
सीबीआई ने विशेष अदालत से एएसआई पंकज शर्मा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ समन जारी कर मुकदमा चलाने की मांग की है। एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्य अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त हैं। मामले की चार्जशीट 31 मार्च को शिमला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल की गई थी, जिस पर अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
उधर, भाजपा ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि सीबीआई के खुलासों से फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट, दस्तावेजों में हेरफेर और अधिकारियों पर दबाव बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
कटवाल ने कहा कि विमल नेगी प्रकरण केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच में सामने आए तथ्यों में सच्चाई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।






