राजभवन बेंगलुरु में हिमाचल दिवस उत्सव को बनाया संस्कृति और गौरव का पर्व
हिमाचली संस्कृति की सुगंध इस बार दक्षिण भारत की हवाओं में भी महक उठी, जब हिमाचली इन बैंगलोर समुदाय ने बेंगलुरु स्थित राजभवन में हिमाचल दिवस का उत्सव पूरे उल्लास, गर्व और परंपरा के साथ मनाया। यह आयोजन न केवल हिमाचली समाज के लिए बल्कि सांस्कृतिक विविधता को आत्मसात करने वाले भारत के लिए भी एक प्रेरक मिसाल बन गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत स्वयं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गोवा, गुजरात और तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व ने इस आयोजन को राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगम का रूप दे दिया। कुल मिलाकर 350 से अधिक अतिथि व सांस्कृतिक कलाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। हिमाचल दिवस की शुरुआत एक प्रभावशाली भाषण से हुई, जिसमें हिमाचल की परंपराओं, विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और लोक जीवन की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। यह भाषण हिमाचल की आत्मा को शब्दों के माध्यम से वहां मौजूद हर हृदय तक पहुंचाने में सफल रहा। इस अवसर पर टीम शान-ए-हिमाचल ने पारंपरिक वेशभूषा में हिमाचली लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी, जिसमें 'नाटी', 'कुलवी नृत्य' और 'किन्नौरी झूमर' जैसी विविध शैलियों ने दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। वहीं, दूसरी ओर टीम नमा हिल्स हार्मनी द्वारा प्रस्तुत हिमाचली लोकगीतों ने माहौल को भावनाओं से सराबोर कर दिया। इन प्रस्तुतियों का निर्देशन व संयोजन मनदीप, समीक्षा और रीना ने किया, जिन्होंने अपने नेतृत्व से कार्यक्रम में नई जान फूंक दी। राज्यपाल गहलोत ने सभी राज्यों की प्रस्तुतियों को भारतीय सांस्कृतिक एकता की जीवंत मिसाल बताया और विशेष रूप से हिमाचली इन बैंगलोर समुदाय के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने हिमाचल की प्रस्तुतियों को ऊर्जावान, सजीव और लोक- संस्कृति के असली प्रतिबिंब की संज्ञा दी। कार्यक्रम के समापन पर टीम को राजभवन स्मृति चिन्ह और सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण, संगठनात्मक कौशल और प्रस्तुति की उत्कृष्टता का प्रतीक बना। हिमाचली इन बैंगलोर के संस्थापक सदस्य दिनेश राणा, सन्नी शर्मा, अस्विन शर्मा और अनुराग धीमान ने कर्नाटक राजभवन प्रशासन, उपस्थित अतिथियों और हिमाचली समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन हिमाचल और कर्नाटक के बीच सांस्कृतिक सेतु की तरह कार्य कर रहा है।












